कार की डिलीवरी लेने के लिए ग्राहकों को करना पड़ रहा है लंबा इंतजार, मारुति की 3.5 लाख कारें हैं पेडिंग
अगर आपने भी कार की बुकिंग की है और अब तक डिलीवरी का इंतजार कर रहे हैं तो आप अकेले नहीं है। दरअसल, कार निर्माता कंपनियों से जुटाए गए कुछ आंकड़ों के अनुसार भारत में 6.5 लाख कारों की डिलीवरी पेंडिंग है। मारुति सुजुकी जैसी बड़ी कार निर्माता से लेकर किया इंडिया जैसी नई कंपनियां ग्राहकों को समय पर कारों की डिलीवरी नहीं कर पा रही हैं।

एक बड़ी कार निर्माता होने के तौर पर मारुति सुजुकी हर साल सबसे ज्यादा कारों की डिलीवरी करती है, लेकिन इस साल मारुति को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह है कि डिलीवरी का इंतजार कर रही 6.5 लाख कारों में 3.4 लाख कारें केवल मारुति सुजुकी की हैं।

हुंडई, टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी अन्य बड़ी कार निर्माता कंपनियां भी डिलीवरी की अनिश्चितता का सामना कर रही हैं। हुंडई और महिंद्रा कारों के बैकलॉग में दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। दोनों कंपनियों को कुल मिलाकर 3 लाख कारों की डिलीवरी करनी है। वहीं घरेलू वाहन निर्माता टाटा मोटर्स वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों से अपनी कारों के लिए जरूरी उपकरणों का इंतजाम करने के बाद, एक से तीन महीने की देरी से कारों की डिलीवरी कर रही है।

वहीं महिंद्रा की कारों पर वेटिंग पीरियड सबसे अधिक है जो 24 महीने तक पहुंच चुका है। महिंद्रा एक्सयूवी700 की बुकिंग कराने वाले ग्राहकों को 24 महीने का वेटिंग पीरियड दिया जा रहा है।

पेट्रोल और डीजल कारों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक कारों पर भी वेटिंग पीरियड लगातार बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक कारों की अग्रणी निर्माता, टाटा मोटर्स अपनी इलेक्ट्रिक कारों को डिलीवरी करने में चार से छह महीने का समय लगा रही है।

जापानी कार निर्माता होंडा भी कारों के बैकलॉग का सामना कर रही है। कंपनी ने हाल ही में सिटी हाइब्रिड सेडान (Honda City Hybrid) को लॉन्च किया है। लेकिन इसकी डिलीवरी के लिए ग्राहकों को 2 से 9 महीने का इंतजार करना पड़ रहा है। सिटी हाइब्रिड सेडान की नई बुकिंग कराने वाले ग्राहकों को 9 महीने का वेटिंग पीरियड दिया गया है।

चिप की कमी ने बढ़ाई मुसीबत
कोरोना महामारी के चलते सेमीकंडक्टर उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ जिसके चलते ऑटो बाजार में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में लगने वाले चिप की भारी कमी हो गई। इसके अलावा महामारी के बाद कारों की बिक्री बढ़ने से सेमीकंडक्टर बनाने वाली कंपनियों पर उत्पादन बढ़ाने का दबाव भी बढ़ गया है।

महामारी का प्रभाव कम होने के बाद रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने से भी दुनिया के कई हिस्सों में वाहनों के साथ-साथ सेमीकंडक्टर का उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। ऑटो उद्योग के जानकारों के मुताबिक सेमीकंडक्टर की किल्लत इस पूरे साल रहने वाली है। बहरहाल, भारत सरकार अब घरेलू बाजार में सेमीकंडक्टर का उत्पादन शुरू करने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहित कर रही है। सेमीकंडक्टर का उत्पादन शुरू करने के लिए वेदांत और टाटा समेत कई कंपनियों ने अपनी रुचि दिखाई है।


Click it and Unblock the Notifications