6 एयरबैग के नियम ने बढ़ा दी कार कंपनियों की चिंता, मारुति ने सरकार से की पुनर्विचार की अपील
भारत में कारों के लिए 6 एयरबैग आवश्यक होने के बाद कई कार कंपनियों की चिंता बढ़ गई है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी ने सरकार से इस फैसले पर फिर से विचार करने की अपील की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबक, कार कंपनियों को डर है कि इस नियम के वजह से किफायती कारों की कीमत काफी बढ़ जाएगी जिसका सीधा असर कारों की बिक्री पर पड़ेगा।

कार कंपनियों का कहना है कि पिछले कुछ सालों से भारत में ऑटोमोबाइल उद्योग अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। कोरोना महामारी के वजह से चल रही सेमीकंडक्टर की कमी और सप्लाई चेन की अव्यवस्था ने वाहनों के उत्पाद और बिक्री को और भी प्रभावित किया है। इससे सभी तरह के वाहनों की कीमत में भी अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। अब कारों के लिए आने वाले 6 एयरबैग के नियम से एंट्री-लेवल की सभी कारें महंगी हो जाएंगी। ऐसे में वह लोग जो दोपहिया वाहन से कार की तरफ जाना चाहते हैं उनकी समस्या और बढ़ जाएगी।

6 एयरबैग वाले नियम को लाने क्या है वजह?
इस साल की शुरुआत में केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि वह इस साल अक्टूबर से कारों में 6 एयरबैग के नियम को अनिवार्य करेंगे। नया नियम उन कारों पर लागू होगा जिनकी सवारी क्षमता कम से कम 8 लोगों की है। गडकरी ने कहा था कि यह नियम यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लाया जा रहा है। उन्होंने सड़क हादसों में यात्रियों के बुरी तरह घायल होने और मौत के लिए कारों में एयरबैग की कमी को बताया था।

क्यों है कारों में ज्यादा एयरबैग की जरूरत?
कार में लगे एयरबैग दुर्घटना के समय यात्रियों की सुरक्षा करते हैं। वर्तमान में भारत में बनने वाली कारों को अनिवार्य रूप से दो एयरबैग देना होता है जो कार के ड्राइवर सीट और फ्रंट पैसेंजर सीट पर होता है। हालांकि, अगर कार में ज्यादा यात्री हों तो दो एयरबैग काफी नहीं हैं। ऐसे में सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कम से कम 6 एयरबैग बेहद जरूरी हैं। अमेरिकी सरकार की कंपनी नेशनल हाईवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन (NHTSA) के आंकड़ों के अनुसार, साल 1987 से 2017 तक केवल फ्रंट एयरबैग ने अमेरिका में 50,457 लोगों की जान बचाई है।

हालांकि, भारत कारों के सेफ्टी फीचर्स के मामले में अभी काफी पीछे है। परिवहन मंत्रालय की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि साल 2020 में 13,022 लोगों की मौत कार में एयरबैग न होने की वजह से हुई। इसमें 4,424 लोगों की मौत कार में साइड इम्पैक्ट के वजह से हुई। इन सभी मामलों को देखते हुए सरकार 6 एयरबैग के नियम को आवश्यक बनाने की नीति पर काम कर रही है।

कार कंपनियों के सामने ये हैं चुनौतियां
कार कंपनियों का कहना है कि इस नियम ने आने के बाद सस्ती कारें महंगी हो जाएंगी। वर्तमान में 10 लाख रुपये से ऊपर की कीमत वाली कारों में ही छह एयरबैग दिए जाते हैं। इन कारों में दो फ्रंट एयर बैग के साथ दो साइड और दो कर्टेन एयर बैग होते हैं। सस्ती कारों में अतिरिक्त एयरबैग को जोड़ने से कीमत में 20,000 रुपये से 25,000 रुपये तक का इजाफा हो सकता है। कार निर्माताओं ने कहा है कि इससे भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाली सस्ती कारों की कीमत में इजाफा होगा जिससे बिक्री पर असर पड़ सकता है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कार ग्राहक डुअल एयरबैग, एबीएस, सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम जैसे सेफ्टी फीचर्स पर ज्यादा ध्यान देते हैं। कार निर्माता इन विकल्पों को अब एंट्री-लेवल कारों में भी पेश करने लगे हैं। इसके अतिरिक्त अन्य फीचर्स को जोड़ने से कार 1 लाख रुपये से 1.20 रुपये तक महंगी हो जाती है। इससे भारत में पहले से ही बिक्री के लिए मशक्कत कर रही एंट्री-लेवल की छोटी कारें और महंगी हो जाएंगी।


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