Yamuna Expressway Fastag Toll System: यमुना एक्सप्रेस-वे पर 1 अप्रैल से होगी फास्टैग से टोल वसूली
सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बीते दिन ही स्क्रैपेज पॉलिसी को लोकसभा में पेश किया है। इसके साथ ही उन्होंने टोल वसूली को जीपीएस के माध्यम से करने की भी जानकारी दी और कहा कि इस योजना के तहत एक साल में हाईवे से टोल प्लाजा को हटा दिया जाएगा।

इसके बाद जीपीएस सिस्टम के माध्यम से टोल टैक्स की वसूली की जाएगी। अब ताजा जानकारी उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेस-वे को लेकर आ रही है। इस जानकारी के अनुसार आने वाली 1 अप्रैल से उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेस-वे पर फास्टैग सुविधा शुरू हो जाएगी।

इसके लिए यमुना एक्सप्रेस-वे, जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड और आईडीबीआई बैंक ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यमुना एक्सप्रेस-वे विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण वीर सिंह ने इस बाबत जानकारी साझा की है।

उन्होंने कहा कि "जेपी कंपनी ने निजी राजमार्ग होने के कारण फास्टैग (एक इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह सिस्टम) शुरू करने से इनकार कर दिया था। कंपनी सख्त अधिकार के बाद अस्तित्व में आई। इसे 15 फरवरी से शुरू होना था, लेकिन सभी तैयारियां पूरी नहीं होने के कारण इसे शुरू नहीं किया जा सका था।"

आगे उन्होंने कहा कि "यमुना विकास प्राधिकरण, आईडीबीआई बैंक और जेपी इंफ्राटेक के प्रतिनिधियों के बीच एक समझौता किया गया है। जिसके चलते अब यमुना एक्सप्रेस-वे पर 1 अप्रैल 2021 से फास्टैग से टोल टैक्स वसूलने की सुविधा शुरू होगी।

बता दें कि नितिन गडकरी ने बीते दिन लोकसभा में कहा कि भारत में टोल बूथों का इस्तेमाल अब बंद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले एक साल के अंदर ही पूरी तरह से जीपीएस आधारित टोल संग्रह को लागू किया जाएगा।

गडकरी का कहना था कि मौजूदा समय में 93 प्रतिशत वाहन फस्टैग का उपयोग कर टोल का भुगतान कर रहे हैं, लेकिन शेष 7 प्रतिशत ने दोगुने टोल का भुगतान करने के बावजूद फास्टैग को नहीं लगवाया है, जिसके चलते इसे जीपीएस से वसूलने की योजना बनाई जा रही है।

गडकरी ने लोकसभा में कहा कि "मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि एक साल के अंदर ही देश के सभी फिजिकल टोल बूथ हटा दिए जाएंगे। इसका मतलब है कि टोल संग्रह जीपीएस के माध्यम से होगा। जीपीएस इमेजिंग के आधार पर टोल की वसूली की जाएगी।"


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