टेस्ला की इलेक्ट्रिक कारों में मिलेगा हिन्दी लैंग्वेज सपोर्ट, लाॅन्च के पहले सामने आई तस्वीरें
टेस्ला की इलेक्ट्रिक करें अब जल्द ही भारतीय सड़कों पर दिखाई देंगी। कंपनी कपनी इलेक्ट्रिक कार को लॉन्च करने के आखरी तैयारी कर रही है। हाल ही में टेस्ला कार के इंफोटेनमेंट सिस्टम को देखा गया है जिसमें हिंदी भाषा में कमांड लिखे हुए हैं। टेस्ला के इंफोटेनमेंट सिस्टम का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है जिसमें हिंदी में कमांड लिखे हुए हैं।

सूत्रों के अनुसार, इससे टेस्ला को भारत में अपने संभावित ग्राहकों तक आसानी से पहुंचने में मदद मिलेगी, जहां हिंदी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। हिंदी के अलावा, टेस्ला ने अपने इंफोटेनमेंट यूआई में रूसी, ग्रीक, क्रोएशियाई और फिनिश जैसी अन्य विदेशी भाषाओं को भी जोड़ा है जो टेस्ला को एक वैश्विक कंपनी होने का प्रमाण देती है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, टेस्ला ने इन भाषाओं को अपने सबसे हालिया सॉफ्टवेयर अपडेट के हिस्से के रूप में जोड़ा है और भारत में आने वाली कंपनी की सभी मॉडलों में हिंदी भाषा में इंफोटेनमेंट सिस्टम का यूजर इंटरफेस देखने को मिलेगा।

लंबे इंतजार के बाद टेस्ला ने इस साल की शुरुआत में जनवरी में भारत में एंट्री की घोषणा की थी। इलेक्ट्रिक कार निर्माता ने कर्नाटक में टेस्ला इंडिया मोटर्स के रूप में पंजीकृत किया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि टेस्ला इस साल तक भारत में अपना परिचालन शुरू करने के साथ, एक विनिर्माण इकाई भी स्थापित कर सकती है।

टेस्ला दुनिया भर में अपनी सबसे लोकप्रिय 'मॉडल 3' इलेक्ट्रिक कार के साथ भारत में एंट्री कर सकती है। चूंकि टेस्ला ने अभी तक भारत में अपनी खुद की विनिर्माण सुविधा स्थापित नहीं की है, इसलिए भारतीय में सबसे पहले बेची जाने वाली कारों को सीबीयू (पूरी तरह से निर्मित इकाई) मार्ग के माध्यम से आयात किए जाने की संभावना है। जानकारी के मुताबिक टेस्ला मॉडल 3 की कीमत लगभग 70 लाख रुपये हो सकती है।

मई में, टेस्ला ने प्रशांत आर मेनन को अपने भारत संचालन के लिए निदेशक नियुक्त किया। मेनन चार साल से टेस्ला के साथ हैं और उन्होंने भारत में कंपनी की शुरूआत की देखरेख के लिए कार्यभार संभाला है।

बता दें कि लॉन्च के पहले टेस्ला ने भारत सरकार को एक पत्र लिखकर इलेक्ट्रिक कारों की इम्पोर्ट ड्यूटी में कमी करने की मांग की है। टेस्ला का कहना है कि इम्पोर्ट ड्यूटी में कमी से कंपनी की इलेक्ट्रिक कारें सस्ती होंगी जिससे बाजार में इनकी मांग बढ़ेगी और सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा।

हालांकि, टेस्ला को इस मांग को भारत सरकार दरकिनार कर सकती है, क्योंकि सरकार ने स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई उद्योगों के लिए उच्च आयात करों का समर्थन किया है। भारत में अन्य लग्जरी वाहन निर्माताओं ने भी भारत में आयात होने वाली कारों पर टैक्स कम करने के लिए अतीत में सरकार की पैरवी की है, लेकिन घरेलू कंपनियों के साथ स्थानीय प्रतिद्वंद्वियों के विरोध के कारण उन्हें बहुत कम सफलता मिली है।


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