Strike At Posco Steel Plant: पाॅस्को स्टील प्लांट में हड़ताल से कार उत्पादन हो सकता है प्रभावित
भारत में ऑटो उद्योग पहले से ही ऑटो पार्ट्स में वैश्विक कमी के कारण संकट का सामना कर रहा है। ऐसे में पॉस्को महाराष्ट्र स्टील लिमिटेड (पीएमएसएल) प्लांट साइट पर विरोध प्रदर्शन के कारण वाहन कंपनियों की समस्या बढ़ गई है। बता दें कि पाॅस्को के स्टील प्लांट में श्रमिक मुद्दों को लेकर कुछ समय से विरोध प्रदर्शन चल रहा है जिसके चलते कार निर्माताओं के लिए आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो गई है।

भारतीय ऑटोमोबाइल निर्माता संघ (SIAM) के अनुसार अगर यह प्रदर्शन आगे भी चलता रहा तो भारत में कई कार कंपनियों को उत्पादन बंद करना पड़ेगा। SIAM ने पहले ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर विरोध प्रदर्शन को समाप्त करने और संयंत्र में काम फिर से शुरू करने के लिए अपना हस्तक्षेप करने की मांग की है।

ऑटोमोबाइल निर्माता संघ ने महाराष्ट्र सरकार को एक पत्र में लिखा है, "पॉस्को में प्रदर्शन से कई कंपनियों की सप्लाई बाधित हो रही है। इससे वाहन कंपनियों को ऑटो कम्पोनेंट की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में नहीं हो रही है। अगर जल्द ही समाधान नहीं निकला गया तो देश में कार निर्माण पूरी तरह ठप पड़ सकता है।"

पॉस्को उद्योग ऑटोमोबाइल कंपनियों को कोल्ड रोल्ड स्टील की शीट की आपूर्ति करता है। देश की लगभग 80 प्रतिशत कार कंपनियां पॉस्को के इस्पात पर निर्भर हैं। ऐसे में स्टील प्लांट से आपूर्ति की कमी का असर सभी कंपनियों पर पड़ेगा।

भारतीय वाहन निर्माता जैसे मारुति सुजुकी, हुंडई मोटर, किआ मोटर्स, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा कुछ ऐसी कंपनियां हैं, जो आमतौर पर इस संयंत्र से विनिर्माण के लिए स्टील प्राप्त करती हैं। अनुमान के मुताबिक, ये कार निर्माता भारत में निर्मित कुल वाहनों के 80 प्रतिशत से अधिक का योगदान करते हैं।

ऑटो इंडस्ट्री बॉडी SIAM ने आशंकाएं जताई हैं कि विरोध प्रदर्शन वास्तव में कोविड-19 के प्रभाव से उबरने के सभी प्रयासों पर पानी फेर सकता है। SIAM ने अपने पत्र में कहा कि इस तरह की घटनाएं भारत की छवि को धूमिल कर सकती हैं।

महाराष्ट्र के लिए, यह ऑटो उद्योग से जुड़ा दूसरा बड़ा संकट है, क्योंकि उसने हाल ही में अपने तालेगांव संयंत्र में परिचालन को रोकने के लिए अमेरिकी कार निर्माता जनरल मोटर्स के आवेदन को खारिज कर दिया था।

जनरल मोटर्स ने इस संयंत्र को चीनी ऑटो प्रमुख वॉल वॉल मोटर्स को बेचने का फैसला किया था, जो कोविड -19 संकट से पहले भारत में निवेश करने की योजना बना रहा था।


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