Renault Partnership With CSC Grameen eStore: रेनॉल्ट अब ग्रामीण इलाकों में बढ़ाएगी पहुंच, जानें कैसे
रेनॉल्ट इंडिया ने कुछ समय पहले ही अपनी नई कॉम्पैक्ट एसयूवी रेनॉल्ट काइगर को भारतीय बाजार में उतारा है। इस कार को भारतीय बाजार में बेहतरीन प्रतिक्रिया मिल रही है। अब रेनॉल्ट इंडिया को लेकर एक नई जानकारी सामने आ रही है। ताजा जानकारी के अनुसार रेनॉल्ट इंडिया अपने नेकवर्क को बढ़ाने की तैयारी कर रही है।

रेनॉल्ट इंडिया से मिली जानकारी के अनुसार कंपनी भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के लिए सीएससी ग्रामीण ईस्टोर के साथ साझेदारी कर रही है। कार निर्माता कंपनी मौजूदा समय में रेनॉल्ट क्विड, ट्राइबर, काइगर और डस्टर जैसी कारों को बेच रही है।

रेनॉल्ट इंडिया सीएससी ग्रामीण ईस्टोर के साथ साझेदारी करने वाली पहली चार-पहिया वाहन कंपनी है। ध्यान देने वाली बात यह है कि साझेदारी के हिस्से के रूप में रेनॉल्ट के उत्पाद की श्रेणी को सीएससी ग्रामीण ईस्टोर पर सूचीबद्ध किया जाएगा।

इसके अलावा इन वाहनों को एस्पिरेशनल वीएलई (गांव स्तर के उद्यमियों) के माध्यम से हंटरलैंड्स में संभावित ग्राहकों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। सीएससी ग्रामीण ई -स्टोर सीएससी की ओर से एक ई-कॉमर्स पहल है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल ऑर्डरिंग और वितरण को बढ़ावा दिया जाता है।

रेनॉल्ट इंडिया ने कहा कि "कंपनी वीएलई को अपने उत्पादों की आपूर्ति को सुविधाजनक बनाने के लिए एक तंत्र के साथ आएगी, जो चुनिंदा सीएससी ग्रामीण ईस्टोर पर उत्पादों को सूचीबद्ध करने में मदद करेगी। वीएलई संबंधित रेनॉल्ट अधिकृत डीलरशिप के समर्थन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राहक एंड से पूछताछ को बढ़ावा दिया जाएगा।

इसके अलावा पूछताछ करने और बिक्री की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। रेनॉल्ट इंडिया ऑपरेशंस के इंडिया सीईओ और एमडी, वेंकटराम मामिलपल्ले ने कहा कि "हम भारतीय ग्रामीण बाजारों में जबरदस्त क्षमता देख रहै हैं, जो कि एक अच्छी बात है।"

उन्होंने कहा कि "ग्रामीण भारत में अपनी उपस्थिति को बढ़ाने और विकसित करने के लिए एक इनोवेटिव और व्यापक रणनीति के साथ आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। डिजिटल परिवर्तन ने भौतिक सीमाओं और बाधाओं को नष्ट करने में एक क्रांतिकारी बदलाव लाया है।"

उन्होंने कहा कि "इससे विभिन्न ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाजारों को एक आम मंच पर लाने में मदद मिलेगी। हमने 'मिट्टी के बेटों' की रणनीति पर अंकुश लगाया और इसके तहत हमने ग्रामीण और छोटे शहरों के 500 शिक्षित युवाओं को भर्ती किया है।"


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