Petrol Price Hike: पेट्रोल ने लगाया शतक, मुंबई में पेट्रोल कीमत 100 के पार
देश में मई महीने में पेट्रोल की कीमतें लगातार बढ़ रही है और अब देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल की कीमत शतक लगा चुकी है। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 29 मई 2021 को 100.19 रुपये हो गयी है, पिछले 24 दिन में पेट्रोल की कीमत में 3.07 रुपये हुई है। चौंकाने वाली बात है कि जब से बीएस6 उत्सर्जन मानक लागू हुए है यानि अप्रैल 2020 से पेट्रोल की कीमतों में 24.91 रुपये की वृद्धि हो चुकी है।

वहीं देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 93.94 रुपये पहुंच गयी है, वहीं चेन्नई में कीमत 92.7 रुपये व कोलकाता में कीमत 93.97 रुपये हो गयी है। इन सभी महानगरों में पेट्रोल की कीमत पिछले अप्रैल के मुकाबले 21 रुपये महंगी हो गयी है। इस महीने के पहले पेट्रोल की कीमतों में इतनी में वृद्धि नहीं हुई थी।

अगर आप डीजल वाहन चलाते है तो आपके लिए भी खबर अच्छी नहीं है। मुंबई में डीजल की कीमत 92.17 रुपये पहुँच गयी है, इस महीने डीजल की कीमत में 3.98 रुपये की वृद्धि हुई है। वहीं पिछले अप्रैल की इसकी कीमत में 26.98 रुपये वृद्धि हुई है, जो कि पेट्रोल के मुकाबले भी अधिक है। मुंबई पेट्रोल व डीजल की कीमत में अंतर अप्रैल 2020 में 10.09 रुपये था वह अब 8.02 रुपये हो गयी है।

दिल्ली में डीजल की कीमत 84.89 रुपये, चेन्नई में कीमत 89.65 रुपये, कोलकाता में कीमत 87.74 रुपये हो गयी है। देश में फ्यूल के बेतहाशा बढ़ते दामों ने सभी तरह के वाहन मालिक, दोपहिया, चारपहिया सहित अन्य, को मुश्किल में दाल दिया है। इसकी वजह से वाहन की बिक्री भी बहुत प्रभावित हो रही है।

देश में फ्यूल की बढ़ती कीमतों का कारण अधिक सेंट्रल व स्टेट टैक्स है। दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल में 35.53% केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी व 23% राज्य सरकार टैक्स लगाती है। यह दोनों टैक्स मिलाकर सरकार 58.60% यानि दिल्ली में पेट्रोल में करीब 55 रुपये सिर्फ टैक्स के रूप में लिया जा रहा है।

ऐसा ही हाल डीजल का भी है, केंद्र सरकार 38.21% व राज्य सरकार 14.64% का वैट लगाती है। कुल मिलाकर राजधानी के रहने वालों को 52.85% टैक्स यानि 44.86 रुपये का टैक्स सरकार वसूलती है। देश में अप्रैल के अंत से फ्यूल की कीमतों में फिर से वृद्धि की शुरुआत हुई है, पांच राज्यों में चुनावों के दौरान यह रुकी हुई थी।

वर्तमान में जहां कोरोना व पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी के चलते लोग पर्सनल ट्रांसपोर्ट का उपयोग अधिक कर रहे हैं और ऐसे में बढ़ते फ्यूल के दाम सभी को सीधे रूप से प्रभावित कर रही है। इसके साथ ही अप्रत्यक्ष रूप से सामानों की बढ़ती कीमत से इसे अनुभव किया जा सकता है।

इसका बुरा असर ऑटो जगत को भी झेलना पड़ रहा है। एक तो कोरोना लॉकडाउन की वजह से वाहन बिक्री पहले ही कम चुकी है, ऊपर से फ्यूल की बढ़ती कीमत की वजह से लोग अब नए वाहन की जगह वाहन रेंटिंग या यूज्ड वाहनों की खरीदी को तरजीह दे रहे हैं, इसका सबसे बुरा सर दोपहिया व कर्मशियल वाहन सेगमेंट में देखनें को मिला है।


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