पैसेंजर व्हीकल की बिक्री सितंबर 2021 में हुई 41 प्रतिशत तक कम, सेमीकंडक्टर्स की कमी है कारण
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने हाल ही में खुलासा किया है कि देश में पैसेंजर व्हीकल की बिक्री सितंबर 2021 के महीने में सितंबर 2020 के मुकाबले में 41% कम हुई है। SIAM के मुताबिक इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण सेमीकंडक्टर चिप की वैश्विक कमी है।

इस कमी के चलते ही दुनिया भर के साथ-साथ भारत में भी कार निर्माताओं को प्रभावित किया है। सितंबर 2021 में उत्पादन में कटौती के बाद यह कटौती अक्टूबर माह में भी जारी रहेगी और सेमीकंडक्टर्स की आपूर्ती में कोई राहत न मिलने के कारण बिक्री में भारी गिरावट आने की संभावना बढ़ गई है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले महीने कार निर्माता कंपनियों ने कुल 160,070 यूनिट कारों की संचयी बिक्री की थी। वहीं मोटरसाइकिल और स्कूटर बिक्री पर नजर डालें तो जहां सितंबर 2020 में कंपनियों ने 1.8 मिलियन वाहन बेचे थे, वहीं सितंबर 2021 में यह संख्या गिरकर 1.5 मिलियन हो गई है।

सेमीकंडक्टर चिप आधुनिक समय के वाहनों के अंदर मस्तिष्क का करते हैं, लेकिन इसका उपयोग उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं जैसे फोन और लैपटॉप में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। जहां एक ओर ऐसी वस्तुओं की मांग में वृद्धि हो रही है, वहीं दूसरी ओर दुनिया Covid-19 जैसी महामारी से उभरने की कोशिश कर रही है।

ऐसी परिस्थियों ने ऑटो निर्माताओं को आपूर्ति की समस्या को बढ़ाने में एक बड़ी भूमिका निभाई है। भारतीय बाजार की बात करें तो कुछ बड़े ब्रांड कुछ ज्यादा ही परेशानी से गुजर रहे हैं। देश की सबसे बड़ी ऑटो निर्माता कंपनी Maruti Suzuki ने सितंबर में उत्पादन में कटौती की घोषणा की थी।

कंपनी ने इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कमी को जिम्मेदार ठहराया था। Maruti Suzuki के उत्पादन में अंतिम दो गुना गिरावट ने पिछले महीने 81,278 यूनिट्स कारों को रोल आउट किया, जबकि 2020 के सितंबर में कंपनी ने 1,66,086 यूनिट्स कारों का उत्पादन किया गया था।

वहीं दूसरी ओर Mahindra & Mahindra ने भी उत्पादन चुनौतियों का सामना किया है और जबकि कंपनी की कारों की मांग कापी मजबूत बनी हुई है। Mahindra Thar और Mahindra XUV700 जैसे नए उत्पादों के लिए भी बाजार में मांग काफी ज्यादा है और इनकी आपूर्ति भी समय पर नहीं हो पा रही है।

भारत और अन्य जगहों पर लगभग हर दूसरी ऑटो कंपनी के लिए सेमीकंडक्टर की चुनौतियां सर्वव्यापी हैं। हालांकि, भारत में समय इससे ज्यादा खराब नहीं हो सकता था क्योंकि त्योहारी अवधि में आमतौर पर मांग में तेजी देखी जाती है।


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