JCB Pothole Pro Launched: जेसीबी ने पॉटहोल प्रो किया लॉन्च, सिर्फ 8 मिनट में होगी गड्ढें की मरम्मत
कंस्ट्रक्शन के उपकरण बनाने वाली कंपनी जेसीबी ने एक नए गड्ढे की मरम्मत करने के लिए अपनी एक नई मशीन पेश की है। जानकारी के अनुसार यह मशीन 8 मिनट से भी कम समय में सड़क के गड्ढों की मरम्मत कर सकती है और इसे पॉटहोल प्रो के नाम से पेश किया गया है।

यह सड़क मरम्मत के लिए एक थ्री-इन-वन सॉल्यूशन है और इसके लिए किसी अन्य उपकरण या चालक दल की आवश्यकता नहीं होती है, जिससे समय और धन दोनों की बचत होती है। जेसीबी ने स्टाफर्डशायर, डर्बीशायर और वेरेक्सहैम में अपने कारखानों के साथ पोथोप्रो को लॉन्च किया।

जेसीबी के अध्यक्ष लॉर्ड बमफोर्ड ने इस लॉन्च के मौके पर कहा कि "गड्ढे राष्ट्र पर एक संकट की तरह है और उन्हें समय पर भरना बहुत जरूरी होता है। इसके साथ ही इसे सही करने की लागत को भी कम करना एक महत्वपूर्ण समाधान है।

बता दें कि जेसीबी के पॉटहोल प्रो से 25 मील प्रति घंटे यानी करीब 40 किमी प्रति घंटे की गति से एक पाली में 250 वर्ग मीटर यानी 2,691 वर्ग फुट सड़क तैयार की जा सकती है और ट्रेलर के उपयोग के बिना यह एक होल से दूसरे होल में ट्रांसफर हो सकता है।

आपको बता दें कि स्टोक-ऑन-ट्रेंट में साल 2020 में जेसीबी पॉटहोल प्रो का ट्रायल रन कंडक्शन किया गया था, जिससे इस बात की जानकारी सामने आई थी कि यह मशीन 700 प्रति माह की औसत दर से छेदों की मरम्मत कर सकती है।

इसके साथ ही इस टेस्ट से पता चला कि जेसीबी ने 20 दिनों में 51 छेद भरे, जिन्हें पूरा करने में 63 दिनों में 6 फिलर्स लग गए। इसमें लगा हाइड्रोलिक झुकाव और डेप्थ कंट्रोल बड़े क्षेत्रों के लिए एक सुसंगत गहराई को सक्षम करता है।
आपको बता दें कि जेसीबी ने यूके की बाजारों के लिए पॉटहोल प्रो को लॉन्च किया है, जहां गड्ढे एक राष्ट्रीय समस्या है। ध्यान देने वाली बात यह है कि ब्रिटिश चांसलर ऋषि सनक ने ब्रिटेन में गड्ढों को ठीक करने और सड़कों की मरम्मत के लिए 1.6 बिलियन यूरो का बजट अलग रखा है।

यह एक बेकहो लोडर पर आधारित मशीन है, जो एक क्लीनर सतह बनाने के लिए गड्ढे के किनारों को काटने की क्षमता रखती है। यह मशीन किसी भी मैनुअल वर्कफोर्स के उपयोग को कम करती है और लागत को 50 प्रतिशत तक कम करने में मदद करती है।

जेसीबी का काम एक बार पूरा हो जाने के बाद ठेकेदार को केवल टार जोड़ने की जरूरत होती है और गड्ढों की मरम्मत सरल, कम लागत और स्थायी तरीके से की जाती है। हालांकि देखा जाए तो भारत को भी ऐसी मशीनों की जरूरत है।
Image Courtesy: diggersanddozers


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