क्या इस दीवाली कार खरीदना होगा सही फैसला? आइये जानें क्या है बड़े कारण
आमतौर पर भारत में त्योहारी सीजन में वाहनों की खरीदी की जाती है, लेकिन जिस दौर से भारतीय ऑटो जगत गुजर रहा है, ऐसे में क्या इस दीवाली पर कार खरीदना सही फैसला होगा? कारों की बढ़ती कीमत, अधिक वेटिंग पीरियड, नए स्क्रैप नियम व फ्यूल की बढ़ती कीमत, ऐसे कुछ कारण है जो वर्तमान में कार खरीदने के मजे को थोड़ा फीका कर सकते हैं।

1. बढ़ती फ्यूल कीमतें
देश भर में पेट्रोल व डीजल की कीमतों में हर दिन वृद्धि हो रही है तथा अधिकतर शहरों में इनकी कीमतें 100 रुपये के पार हो गयी है। ऐसे में पेट्रोल का भी चुनाव कर रहे हैं तो आपको और भी अधिक कीमत चुकानी होगी, पेट्रोल की कीमत हर दिन एक नई ऊंचाई छु रही है और कई जगह 117 रुपये/लीटर तक पहुंच गयी है। आने वाले समय में फ्यूल की कीमतों के कम होने के आसार भी नहीं लग रहे हैं। ऐसे में नई कार खरीदना, खरीदने के बाद और भी खर्चीला साबित हो सकता है।

2. बढ़ती कार कीमतें
देश के अधिकतर कार कंपनियों ने अपने कारों की कीमतों में इस साल 3 बार वृद्धि की है और माना जा रहा है कि इस त्योहारी सीजन के पहले या नवंबर में कारों की कीमतों में फिर से इजाफा किया जा सकता है। साल के शुरुआत में जनवरी में वार्षिक रूप से होने वाली कीमत वृद्धि की गयी थी, उसके बाद अप्रैल तथा उसके बाद अगस्त-सितंबर में कारों की कीमत बढ़ाई गयी थी। ऐसे में कारों की कीमत इस दिवाली आपके जेब को काफी हल्का कर सकती है।

3. लंबा वेटिंग पीरियड
दुनिया भर में चिप की कमी के चलते कारों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, इससे भारतीय बाजार की भी अधिकतर कंपनियां प्रभावित हो रही है। बतातें चले कि लोकप्रिय एसयूवी के लिए 3 - 6 महीनों का इंतजार करना पड़ रहा है, कई-कई मॉडल्स के लिए तो एक साल तक का इंतजार करना पड़ सकता है। इससे नए मॉडल्स जैसे महिंद्रा एक्सयूवी700, एमजी एस्टर जैसे मॉडल्स भी प्रभावित है।

ऐसा नहीं है कि कंपनियां मांग के अनुसार उत्पादन नहीं कर पा रही है। कंपनियों ने वाहनों का उत्पादन करके फैक्ट्री यार्ड पर ही रखा हुआ है लेकिन आधुनिक कारों में सेमीकंडक्टर की जरूरत के चलते उन्हें डीलर्स के पास नहीं भेजा जा रहा है। खबर है कि आने वाले कुछ महीनों तक भी यहीं हालत बनी रह सकती है, ऐसे में अगले साल ही कार खरीदने का निर्णय सही रहेगा।

4. इलेक्ट्रिक वाहनों को मिल रही तरजीह
नए कार खरीदने की सोच रहे हैं तो अब सरकार भी पेट्रोल, डीजल कारों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को तरजीह दे रही है और इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को बढ़ाने के लिए कई तरह के स्कीम और छूट लेकर आई है। फेम 2 के तहत वाहन खरीदी पर तो छूट दी जा रही है, साथ ही रोड टैक्स पर छूट, ईवी चार्जर पर छूट दी जा रही है।

5. ऑफर्स में कमी
पहले के मुकाबले कार कंपनियों ने ऑफर्स और डिस्काउंट भी कम कर दिए हैं। हाल ही में जाटो डायनामिक्स द्वारा जारी किये आंकड़ों के अनुसार पिछले 3 सालों में कारों पर मिलने वाली छूट पर भारी कमी आई है जिस वजह से नए ग्राहकों को उतनी छूट नहीं मिल पाएगी और अधिक कीमत चुकानी होगी।

देश भर में कार कंपनियों के पहले से ही काफी आर्डर लंबित है और ऐसे में अभी कार बुक कराने पर अच्छा खासा इंतजार करना पड़ सकता है। उत्पादन में कमी की वजह से देश की सबसे कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के पास 2.2 लाख पेंडिंग आर्डर है, ऐसे में कंपनी अधिक बिकने वाले मॉडल्स का उत्पादन तेजी से कर रही है।

ड्राइवस्पार्क के विचार
देश में कारों की बिक्री में पिछले कुछ महीनों में कमी दर्ज की गयी है और इसका बड़ा कारण ऑर्डर्स की कमी नहीं, बल्कि उत्पादन की कमी है। ऐसे में अगर आप इस त्योहारी सीजन में कार खरीदने का सोच रहे हैं तो आपको अपने निर्णय पर एक और बार विचार करना होगा।


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