भारत की सड़कों पर दौड़ेंगी हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली कारें, तेजी से हो रहा है विकास
देश की सड़कों में अब जल्द ही आपको हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली कारें दिखाई देंगी। केंद्र सरकार ने हाल ही में ऑटो क्षेत्र के लिए अपनी प्रस्तावित 8 बिलियन डॉलर की योजना को संशोधित किया है, जो अब कंपनियों को इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाले वाहनों के निर्माण के लिए प्रोत्साहित करने पर ध्यान केंद्रित करेगी।

बता दें कि अब तक सरकार गैसोलीन (पेट्रोल) और इलेक्ट्रिक कारों के निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए ही लाभ दे रही थी। हालांकि, अब सरकार का मुख्य लक्ष्य हाइड्रोजन फ्यूल पर चलने वाली कारों को प्रोत्सान होगा। यह ऑटो और ऑटो पार्ट निर्माता को प्रोत्साहित करने की सरकार की मूल योजना से एक महत्वपूर्ण बदलाव है।

फ्यूल सलूशन के रूप में हाइड्रोजन न केवल जैविक ईंधन बल्कि इलेक्ट्रिक पावरट्रेन के विकल्प के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। हाल ही में साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्टर जितेंद्र सिंह ने एक बयान में कहा था कि भविष्य में भारत एक ग्लोबल ग्रीन हाइड्रोजन हब बनने की क्षमता रखता है। उनका मानना है कि एमिशन को कम करने के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए अनडिवाइडेड एनर्जी का निवेश किया जाना चाहिए।

अपने बयान में उन्होंने आगे कहा कि, "ग्रीन हाइड्रोजन न केवल हमें एमिशन में कटौती करने में मदद करेगा, बल्कि यह हमारे देश के आत्मनिर्भर बनने के प्रधान मंत्री मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत को कई कार्यक्षेत्रों में सहायता करेगा।"

सूत्रों के अनुसार, नए प्रस्ताव के तहत भारत वाहन निर्माताओं को केवल इलेक्ट्रिक वाहनों और हाइड्रोजन ईंधन सेल कारों के निर्माण के लिए प्रोत्साहन देगा। सूत्रों ने बताया कि सरकार नई तकनीकों के तरफ ध्यान केंद्रित कर रही है और पुरानी तकनीकों को बढ़ावा देने पर पैसा खर्च नहीं करना चाहती है।

हालांकि, ऑटो पार्ट्स निर्माताओं को इलेक्ट्रिक, सीएनजी और इथेनॉल पर चलने वाली कारों के लिए कंपोनेंट्स के उत्पादन के साथ-साथ सुरक्षा से संबंधित उपकरणों और कनेक्टेड तकनीक, स्वचालित ट्रांसमिशन, क्रूज कंट्रोल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स में उपयोग किए जाने वाले सेंसर और रडार जैसी अन्य उन्नत तकनीकों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

भारत सरकार अपनी हाइड्रोजन पॉलिसी के तहत 40 प्रतिशत तक जैविक ईंधन का इस्तेमाल कम करना चाहती है। इसे पूरा करने का लक्ष्य 2030 तक रखा गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली गाड़ियों और तकनीक को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जाएगा। यह देश की मौजूदा स्थिति में सुधार लाने और ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने का इरादा रखता है।

भले ही भारत में इलेक्ट्रिक वाहन अभी भी अपनी प्रारंभिक अवस्था में हैं, फिर भी इनमें ग्राहकों का रुझान धीमी गति से बढ़ रहा है। देश में हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाले वाहनों की तकनीक को विकसित किया जा रहा है, जो अभी प्रारंभिक चरण में है। भारत में, वाहन निर्माताओं ने अभी तक हाइड्रोजन फ्यूल सेल वाहनों को पेश नहीं किया है जो पूरी तरह से एमिशन मुक्त हों। इसका मुख्य कारण महंगी विकास लागत है, जो वाहनों की खरीद लागत को बढाती है। इसके साथ ही हाइड्रोजन एनर्जी का प्रोडक्शन भी एक महंगा सौदा है।


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