कार के Rear-View Mirror के इतिहास को जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान, जानें कैसे हुआ इसका इजाद
आज के समय में Rear-View Mirror किसी भी कार का एक बहुत ही जरूरी हिस्सा होता है और इसे हर कार में स्टैंडर्ड तौर पर दिया जाता है। हालांकि 1900 के दशक की शुरुआत में ऐसा नहीं था। निर्माताओं ने 1930 के दशक की शुरुआत में ही इस जरूरी हिस्से को अपनी कारों में जोड़ना शुरू किया था। आज आधुनिक कारों में Rear-View Mirror के इतिहास पर एक नजर डालते हैं, जो काफी दिलचस्प है।

Rear-View Mirror अस्तित्व में कैसे आया?
ड्राइवरों को सड़क पर तेजी से ड्राइव करने में मदद करने के लिए Rear-View Mirror का इजाद हुआ था। इस शीशे को कार में लगाने का मकसद कार को रफ्तार पर चलाना ही था। साल 1911 के आस-पास रेसर Ray Harroun पहले व्यक्ति थे, जिन्हें Rear-View Mirror रखने का विचार आया था।

उन्होंने घोड़ा गाड़ी में कुछ ऐसा ही देखा और उन्हें लगा कि यह हाई-स्पीड ड्राइविंग में वास्तव में मददगार होगा। अब तक उसके साथ एक सह-चालक हुआ करता था, जो उसे बताता था कि क्या लेन बदलना सुरक्षित है। इस Rear-View Mirror से उन्होंने न सिर्फ यह कार खुद किया, बल्कि कार से एक व्यक्ति का वजन भी किया।

यह कब आधिकारिक हुआ?
साल 1921 में Elmer Berger ने आगे बढ़कर उद्योग में पहले Rear-View Mirror का पेटेंट कराया। उन्होंने इस डिवाइस का नाम "COP SPOTTER" रखा, क्योंकि उन्होंने मुख्य रूप से इसका इस्तेमाल अपनी कार का पीछा करने वाली पुलिस को देखने के लिए किया था।

लेकिन इस अनोखे इस विचार ने मोटर वाहन उद्योग में एक प्रमुख योगदान निभाया और एक क्रांति ला दी और आज की आधुनिक कारों में भी इसका इस्तेमाल होने लगा।

आज के आधुनिक Rear-View Mirror
तब से उद्योग ने एक लंबा सफर तय किया है और अब हमारे पास बेहतर रियर विजिबिलिटी के लिए सभी प्रकार के Rear-View Mirror मौजूद हैं। आज के आधुनिक Rear-View Mirror या कहें IRVM में खुद के कैमरे और सेंसर डिस्प्ले का इस्तेमाल किया जाता है।

इस बारे में जानकारी मिलना वास्तव में बहुत ही मनोरंजक है कि Rear-View Mirror वास्तव में दुनिया में कैसे आया। इस बात का अंदाजा किसी ने नहीं लगाया होगा कि पुलिस को देखने के लिए जो मिरर इस्तेमाल किया जाता है वह वास्तव में पूरी दुनिया में उपयोग में आएगा।


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