Govt Notifies Draft On Scrappage Policy: 15 साल से ज्यादा पुराने सरकारी वाहनों का रद्द होगा रजिस्ट्रेशन
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा पुराने वाहनों के उपयोग संबंधी एक प्रस्ताव पारित होने के बाद देश में 15 साल से अधिक पुराने सरकारी वाहनों का पंजीकरण नवीनीकरण 1 अप्रैल 2022 से रोक दिया जाएगा। नया नियम सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के उपक्रम के तहत आने वाले सभी सरकारी वाहनों पर लागू होगा।

मंत्रालय ने 12 मार्च को अधिसूचना जारी करते हुए 30 दिन के भीतर सभी हितधारकों से टिप्पणी, आपत्ति और सुझाव की मांग की है। केंद्रीय बजट 2021 पेश करते समय वित्तीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने वाहन स्क्रैपेज पॉलिसी को लागू करने की घोषणा की थी।

वाहन स्क्रैपेज नीति के तहत 15 साल से अधिक पुराने कमर्शियल वाहन और 20 साल से अधिक पुराने प्राइवेट वाहनों को स्क्रैप करने की नीति बनाई गई है। स्क्रैपिंग नीति लागू होने के बाद नए वाहन पुराने वाहनों की जगह लेंगे जो ईंधन की अधिक बचत करेंगे साथ ही प्रदूषण भी कम करेंगे।

स्क्रेपिंग नीति के आने से देश में नए रोजगार भी उत्पन्न होंगे। केंद्र सरकार स्क्रैपिंग नीति के तहत 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करने वाली है जिससे 50,000 नौकरियां सृजित होंगी। स्क्रैपिंग नीति के तहत नीति के तहत लगभग 1 करोड़ पुराने भारी, मध्यम और हल्के वाहनों को स्क्रैप किया जाएगा।

स्क्रैपेज पॉलिसी के आने के बाद पुराने धातु की रीसाइक्लिंग, वायु प्रदूषण में कमी, वर्तमान वाहनों की अधिक ईंधन दक्षता के कारण तेल आयात में कमी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। वाहन स्क्रैपेज पॉलिसी से देश में वाहन निर्माताओं का कारोबार 30 प्रतिशत बढ़कर 10 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा जो अभी 4.5 लाख करोड़ रुपये का है।

स्क्रैपिंग नीति में पुराना वाहन स्क्रैप कराने वाले वाहन मालिकों को नए वाहन की खरीद पर छूट देने का प्रावधान किया गया है। केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया है कि वाहन स्क्रैपेज पॉलिसी के तहत पुराना वाहन स्क्रैप कराने वाले लोगों को नई कार की कीमत पर 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।

वाहन स्क्रैपिंग पॉलिसी के तहत सरकार पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चिन्हित कर सरकार ग्रीन टैक्स भी लगा सकती है। वाहनों का तय समय पर पोल्यूशन टेस्ट करवाना अनिवार्य किया गया है। इसके लिए सरकार प्राइवेट पार्टनर्स की मदद से देशभर में स्वचालित टेस्ट सेंटर खोल रही है।

केंद्र सरकार ने ईंधन के आयात पर होने वाले खर्च को कम करने के लिए पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल के मिश्रण को अनुमति दे दी है। इसके पहले पेट्रोल में केवल 10 प्रतिशत ही इथेनॉल के मिश्रण को मंजूरी दी गई थी। इसके लिए केंद्र सरकार ने वाहन कंपनियों से ब्लेंडेड पेट्रोल से चलने वाले वाहनों को तैयार करने की अपील की है।

एक रिपोर्ट के अनुसार ब्लेंडेड पेट्रोल के उपयोग से देश में हर साल 1 लाख करोड़ रुपये की बचत होगी। भारत में अपनी जरूरत का 85 फीसदी ईंधन बहार के देशों से आयात किया जाता है। राष्ट्रीय बायोफ्यूल पॉलिसी 2018 के तहत 2030 तक पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग को 20 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा गया था। इसके लिए देश में बायोफ्यूल के उत्पादन को रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ाने की रणनीति बनाई गई है।


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