Vehicle Scrapping Policy: 15 साल से अधिक पुराने सरकारी वाहन होंगे स्क्रैप, जल्द लागू होगी वाहन स्क्रैपिंग नीति
केंद्र सरकार जल्द ही पुराने सरकारी वाहनों को उपयोग से हटाने के लिए स्क्रैपिंग पॉलिसी लाने वाली है। बता दें कि गुरुवार को वाहन स्क्रैपिंग पॉलिसी पर हुई एक बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबंधित विभागों को ऐसे सरकारी वाहनों को चिन्हित करने का आदेश दिया है जो 15 साल से अधिक समय से उपयोग में हैं।

हालांकि, सरकारी वाहनों की तादाद काफी कम है, लेकिन सरकार सबसे पहले पुराने आधिकारिक वाहनों को हटाकर स्क्रैपिंग नीति के प्रति अपने संकल्प का संदेश देना चाहती है।

इकनोमिक टाइम्स ऑटो की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों को बजट से पहले स्क्रैपिंग नीति को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया है।

इसके अलावा उन्होंने देशभर में स्वचालित वाहन फिटनेस टेस्ट सेंटर और स्क्रैपिंग केंद्रों के निर्माण कार्य में तेजी लाने की बात भी कही है। इस बैठक के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा है कि देश में वाहन स्क्रैपिंग पॉलिसी को अगले बजट सत्र (2021-22) से लागू कर दिया जाएगा।

बता दें कि देश में पिछले कई वर्षों से वाहन स्क्रैपिंग से संबंधित कानून बनाए जाने का प्रयास किया जा रहा है। केंद्र सरकार का मानना है कि देश में प्रदूषण नियंत्रण के लिए पुराने वाहनों को बदलना काफी जरूरी है।

एक रिपोर्ट के अनुसार 15 साल से पुराने वाहन अधिक प्रदूषण फैलाते हैं। इनमें ट्रकों, बसों और पर्सनल वाहनों की अधिक संख्या है।

इन वाहनों को कानूनी रूप से हटाने के लिए देश भर की कई संस्थाएं केंद्र सरकार से वाहन स्क्रैपिंग पॉलिसी को निर्धारित करने की अपील कर रही हैं। केंद्र परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, नितिन गडकरी भी कई बार वाहन स्क्रैपिंग नीति को जल्द ही लाने की बात कह चुके हैं।

बता दें कि स्क्रैपिंग नीति से वाहन कंपनियों को भी फायदा होने वाला है। पुराने वाहनों के स्क्रैप होने से नए वाहनों की मांग बढ़ेगी, साथ ही स्क्रैप किये गए वाहनों से निकले धातुओं को दोबारा इस्तेमाल में लाया जा सकेगा जिससे निर्माण लागत में भी कमी आएगी।

इसके साथ ही देश में चल रहे गैरकानूनी स्क्रैपिंग केंद्रों पर भी कार्रवाई की जाएगी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अध्ययन में सामने आया है कि लगभग 25 प्रतिशत अपशिष्ट पदार्थ, भारी धातुओं, अपशिष्ट तेलों, कूलेंट, ओजोन-घटाने वाले पदार्थों और अन्य की उपस्थिति के साथ, एक संभावित पर्यावरणीय खतरा पैदा करता है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा कि वाहनों को सही तरीके से स्क्रैप काना जरूरी है ताकि स्क्रैपिंग के दौरान निकलने वाले प्रदूषण से वातावरण दूषित न हो। पर्याप्त क्षेत्र, उचित उपकरण और अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं के साथ लाइसेंस प्राप्त एजेंसियों ने ग्रेटर नोएडा और सोनीपत जैसे एनसीआर शहरों में काम करना शुरू कर दिया है।


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