Protest Against Vehicle Scrappage Policy: गोवा के बस चालकों ने किया वाहन स्क्रैपिंग पाॅलिसी का विरोध
केंद्र सरकार ने प्रदूषण फैलाने वाले 15 साल से अधिक पुराने वाहनों को कबाड़ घोषित करने के लिए स्क्रैपिंग पालिसी को लागू कर दिया है। इस नीति की तहत 15 साल से अधिक पुराने कमर्शियल वाहन और 20 साल से ज्यादा पुराने प्राइवेट वाहनों को सरकार चलने से रोकेगी। हालांकि, केंद्र सरकार की स्क्रैपिंग नीति का गोवा के बस चालक संघ ने विरोध दर्ज किया है।

संघ ने बताया कि स्क्रैपिंग नीति में बदलाव के लिए गोवा बस चालकों का एक समूह राज्य मंत्रियों और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भी मुलाकात करेगा। वे सरकार से 15 साल के तय समय सीमा को बढ़ाने की मांग कर सकते हैं।

संघ ने बताया कि स्क्रैपिंग नीति में बदलाव के लिए गोवा बस चालकों का एक समूह राज्य मंत्रियों और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भी मुलाकात करेगा। वे सरकार से 15 साल के तय समय सीमा को बढ़ाने की मांग कर सकते हैं।

बता दें कि वाहन स्क्रैपिंग नीति के तहत 20 साल से अधिक पुराने 51 लाख हल्के मोटर वाहन, 15 साल से ज्यादा पुराने 34 लाख हल्के मोटर वाहन और 17 लाख से अधिक मध्यम और भारी वजन के मोटर वाहन जो 15 साल से अधिक पुराने हैं, उन्हें स्क्रैपिंग के लिए चिन्हित किया गया है।

ऐसे वाहन नए वाहनों के मुकाबले 10-12 गुणा अधिक उत्सर्जन करते हैं। नए और फ्यूल एफिसिएंट वाहनों के आने से ईंधन की खपत कम होगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी और सरकार को तेल आयात भी कम करना पड़ेगा। इसके अलावा वाहनों को 8 साल में एक बार ग्रीन टेस्ट करवाना अनिवार्य किया गया है। ग्रीन टेस्ट में फेल होने वाले वाहनों को भी स्क्रैप किया जाएगा।

केंद्र सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि स्क्रैपिंग निति के तहत अगर वाहन ग्राहक अपने पुराने वाहन को स्क्रैप करते हैं तो नए वाहन की कीमत पर उन्हें 5 प्रतिशत का छूट दिया जाएगा। वाहनों के पोल्यूशन टेस्ट को सुविधाजनक बनाने के लिए सरकार प्राइवेट कंपनियों की मदद से स्वचालित पोल्यूशन टेस्ट सेंटर खोलने वाली है।

स्क्रैपिंग नीति के आने से देश में नए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। केंद्र सरकार स्क्रैपिंग नीति के तहत 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करने वाली है जिससे 50,000 नौकरियां सृजित होंगी।

वाहन स्क्रैपेज पॉलिसी से देश में वाहन निर्माताओं का कारोबार 30 प्रतिशत बढ़कर 10 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा जो अभी 4.5 लाख करोड़ रुपये का है। वाहन कंपनियों के अलावा स्क्रैप इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की भी आमदनी बढ़ेगी।


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