पुरानी कारों में फ्रंट सीट पैसेंजर के लिए एयरबैग लगवाने की समय सीमा चार महीने बढ़ी, जानें नई डेडलाइन
सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने बिना फ्रंट सीट पैसेंजर एयरबैग वाली कारों में एयरबैग लगवाने की समय सीमा चार महीने बढ़ा दी है। अब कार कंपनियों को यह काम 31 दिसंबर 2021 तक पूरा कर लेना होगा। हालांकि, नई कारों में यह नियम 1 अप्रैल, 2021 से अनिवार्य रूप से लागू है। सरकार ने कोरोना को देखते हुए समय सीमा में ढील दी है।

देश में कार यात्रियों की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए ड्राइवर सीट के साथ फ्रंट पैसेंजर सीट के लिए भी एयरबैग को अनिवार्य किया गया है। भारत में बनने और बेची जाने वाली सभी कारों में आगे की पंक्ति में दो एयरबैग का अनिवार्य प्रावधान है।

हालांकि, कार कंपनियों ने नए नियमों के क्रियान्वयन के लिए अधिक समय की मांग की है। उनका कहना है कि एयरबैग की फिटिंग के लिए उन्हें अपनी प्रोडक्शन लाइन में थोड़ा बदलाव करना होगा।

बता दें कि फ्रंट सीट पैसेंजर एयरबैग की अनिवार्यता सुप्रीम कोर्ट की समिति के सुझावों पर आधारित है। इसे भारतीय सड़कों पर वाहनों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा विशेषता के रूप में जारी किया गया था।

इन सुझावों में कहा गया है कि एयरबैग को भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) निर्देशों के तहत एआईएस 145 मानक को पूरा करने की आवश्यकता होगी। इस नियम से भारत में उन एंट्री-लेवल कारों में सुरक्षा बढ़ेगी जिनमें फ्रंट पैसेंजर एयरबैग नहीं दिए गए हैं।

बता दें कि फ्रंट सीट एयरबैग के जुड़ने से भारत में एंट्री-लेवल कारों की कीमतों पर सीधा असर पड़ेगा। नए नियम की घोषणा के बाद एयरबैग लगाने वाली कंपनी ऑटोलीव ने भारत में निवेश करने का निर्णय लिया है। यह कंपनी कारों में लगाए जाने वाले एयरबैग के लिए इन्फ्लेटर तैयार करती है।

बता दें कि सड़क दुर्घटना के समय यात्रियों की सुरक्षा में एयरबैग अहम भूमिका निभाता है। कार के किसी दूसरे वाहन से टकराते ही एयरबैग खुल जाता है जिससे चालक चालक गंभीर चोट से बच जाता है। सरकार के आदेश के बाद कंपनियों ने सीटबेल्ट रिमाइंडर, स्पीड अलर्ट, रिवर्स पार्किंग सेंसर जैसे कई सुरक्षा फीचर्स को अनिवार्य किया है।


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