Ford भारत में बंद करेगी कारों का उत्पादन, केवल आयात के जरिए बेचेगी हाई-एंड कारें
अमेरिका की प्रसिद्ध कार निर्माता फोर्ड (Ford) ने भारत से घरेलू कारोबार बंद करने की घोषणा कर दी है। कंपनी ने आज एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि वह भारत में अपने सानंद (गुजरात) और चेन्नई (तमिलनाडु) स्थित प्लांट में कारों का उत्पादन बंद कर रही है। कंपनी ने बताया कि अगले एक साल में वह इन दोनों संयंत्रों (Manufacturing Plants) में कारों का उत्पादन पूरी तरह बंद कर देगी। हालांकि, कंपनी बाहर के देशों में निर्यात के लिए इंजन का निर्माण जारी रखेगी।

इस फैसले पर फोर्ड इंडिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अनुराग मेहरोत्रा ने कहा, "कंपनी पिछले 10 वर्षों से घाटे में चल रही थी जिससे कंपनी को 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। भारत में कंपनी की बिक्री लगातार घट रही है और पिछले कुछ सालों में कार बाजार में मंदी के कारण कारोबार के बढ़ने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। इन सभी कारणों के वजह से उत्पादन बंद करने का फैसला लिया गया है।"

फोर्ड ने यह भी कहा है कि कंपनी अपने मौजूदा ग्राहकों को सेवाएं देना जारी रखेगी। उत्पादन बंद होने के बाद भी फोर्ड के सर्विस सेंटर और कस्टमर पॉइंट खुले रहेंगे ताकि मौजूदा ग्राहकों को समय पर सर्विसिंग मुहैया कराया जा सके।

फोर्ड ने कहा है कि वह भारत में अपने कुछ लग्जरी उत्पादों को सीबीयू रूट (आयात मार्ग) से लाने पर विचार कर रही है। इन उत्पादों में फोर्ड की प्रीमियम स्पोर्ट्स कार Ford Mustang और हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक एसयूवी Ford Mach E शामिल हैं। जहां तक मौजूदा उत्पाद सूची की बात है, डीलर इन्वेंटरी में उपलब्ध कारों के बिक जाने के बाद बिक्री पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। कंपनी की मौजूदा उत्पाद सूची में फिगो, एस्पायर, फ्रीस्टाइल, ईकोस्पोर्ट और एंडेवर जैसी करें शामिल हैं।

भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में पिछले कुछ सालों से ऐसी चर्चा थी कि फोर्ड जल्द ही भारत में उत्पादन बंद कर सकती है। हालांकि, कंपनी ने इससे पहले कभी भी भारत में अपनी योजनों को लेकर कोई खुलासा नहीं किया था। बता दें कि पिछले साल फोर्ड और महिंद्रा ने एक ज्वाइंट वेंचर के तहत भारत में नए उत्पाद को लाने की घोषणा की थी, लेकिन कुछ महीनों के भीतर ही फोर्ड इस साझेदारी से बाहर आ गई।

जानकारों का मानना है कि 2019 में भारतीय कार बाजार में Kia और MG Motor के आने से Ford की बिक्री लगातार गिरती चली गई। इसके अलावा BS-6 उत्सर्जन मानकों के लागू होने के बाद कारों का उत्पादन महंगा हो गया। पिछले एक साल से चल रहे कोरोना महामारी के दौरान कंपनी को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है।

मौजूदा समय में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में चल रहे सेमीकंडक्टर चिप की कमी भी फोर्ड के सामने मुश्किल बनकर खड़ी हो गई। कंपनी ने भारत में हो रहे घाटे का मूल्यांकन करने के लिए अपने एक सीनियर एग्जीक्यूटिव को नियुक्त किया था।


Click it and Unblock the Notifications








