Ford To Make 3D Printed Components: 3डी प्रिंटिंग कचरे से ऑटो कंपोनेंट बनाएगी फोर्ड, एचपी से की साझेदारी
फोर्ड मोटर्स अब 3डी प्रिंटिंग के कचरे को ऑटोमोबाइल उपकरण में बदलेगी। हाल ही में फोर्ड ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्माता एचपी से साझेदै की है, जिसके तहत फोर्ड 3डी प्रिंटिंग से निकले कचरे और बचे हुए कच्चे माल का इस्तेमाल कर कारों के लिए उपकरण और पुर्जे बनाएगी। कारों के लिए यह उपकरण 3डी प्रिंटिंग तकनीक के जरिए ही बनाए जाएंगे।

फोर्ड का कहना है कि इंजेक्शन मोल्डिंग तकनीक से बनाए गए ऑटो कंपोनेंट्स पर्यावरण के लिए अनुकूल होते हैं। इसके साथ ही यह साधारण कंपोनेंट्स के मुकाबले 7 प्रतिशत हल्के और 10 प्रतिशत कम सस्ते होते हैं। कंपनी ने यह भी बताया कि इनमें गुणवत्ता और मजबूती से कोई समझौता नहीं किया जाता है।

फोर्ड पहले भी अपनी ट्रकों में 3डी प्रिंटेड कंपोनेंट्स का इस्तेमाल कर चुकी है। फोर्ड ने सबसे पहले अपनी सुपर ड्यूटी एफ-20 ट्रक के फ्यूल पाइपलाइन में 10 जगह 3डी प्रिंटेड कॉम्पोनेन्ट का इस्तेमाल किया था।

फोर्ड ने एक बयान में कहा है कि कंपनी पर्यावरण का ख्याल रखते हुए ऑटोमोबाइल निर्माण में प्रकृति के अनुकूल तकनीक को बढ़ावा दे रही है। वाहनों के लिए 3डी प्रिंटेड उपकरण सस्ते और टिकाऊ होते हैं, साथ ही इन्हे तैयार करने में वातावरण को भी नुकसान नहीं होता है।

फोर्ड ने बताया कि कंपनी आने वाले समय में 3डी प्रिंटेड ऑटो कंपोनेंट्स का एक ईकोसिस्टम खड़ा करेगी। फोर्ड के लिए इस तकनीक को तैयार करने में एचपी का भी अहम योगदान है। एचपी दावा करती है कि कंपनी के नए 3डी प्रिंटर शून्य प्रिंटिंग कचरा उत्पन्न करते हैं।

भारत में फोर्ड ने कार निर्माण के लिए महिंद्रा एंड महिंद्रा से साझेदारी की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों कंपनियां सहयोग से भारत में एक नई एसयूवी को लॉन्च करने की तैयारी कर रही थीं। हालांकि, अब दोनों कंपनियां इस साझेदारी से बाहर आ गई हैं।

फोर्ड ने हाल ही में खुलासा किया है कि वह महिंद्रा के साथ किसी भी प्रोजेक्ट पर काम नहीं कर रही है। बता दें कि कंपनियों की साझेदारी में अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ भारत के लिए भी कारों को तैयार किया जाना था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक कोविड-19 महामारी के बाद आर्थिक और व्यावसायिक स्थितियों में बदलाव के कारण इस ज्वाइंट वेंचर को बंद करने का फैसला लिया गया। आपको बता दें कि फोर्ड और महिंद्रा ने भारत के लिए कम से कम तीन स्पोर्ट-यूटिलिटी वाहनों (एसयूवी) को विकसित करने की योजना बनाई थी।


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