Ford के डीलरशिप होंगे कम और कुछ ही बेचेंगे नए वाहन, मौजूदा स्टॉक पर मिल रहे ऑफर्स
Ford ने हाल ही में भारत में उत्पादन बंद करने की घोषणा की है जिस वजह से अब बिक्री बंद होने जा रही है, यह ग्राहकों के साथ डीलर्स व पूरे ऑटो जगत के लिए आश्चर्यजनक था। Ford ने हाल ही में जानकारी दी है कि कंपनी के कुछ डीलर्स कम होने वाले हैं और कुछ ही डीलर्स नए वाहन की बिक्री करने वाले हैं, अपने डीलरशिप को बनाये रखने के लिए कंपनी ने एक नीति भी निकाली है।

Ford इस वित्तीय वर्ष के दूसरे तिमाही में बिक्री व एक्सपोर्ट बंद करने वाले है और मौजूदा स्टॉक की बिक्री की जा रही है। कंपनी के नए निर्णय से डीलर्स के लिए अब नए निर्णय मुश्किल हो गया है, ऐसे में ग्राहक भी अनिश्चित है कि नए पार्ट्स कैसे मिलने वाले हैं, इसको लेकर कई ग्राहक शिकायत भी कर रहे हैं। लेकिन कंपनी ने डीलर्स को बनाये रखने के लिए सभी कदम उठा रही है।

कंपनी की यह नीति डीलर्स को सपोर्ट करने वाली है जिससे वह स्पेयर पार्ट्स व सर्विस देना जारी रखेंगे। Ford ने भारत छोड़ने के निर्णय के साथ इन नीतियों की घोषणा की है, इसमें सर्विस, पार्ट्स व वारंटी सपोर्ट शामिल है। इसके लिए कंपनी दिल्ली, मुंबई, सनद, चेन्नई व कोलकाता में पार्ट्स डिपो मेंटेन करने वाली ताकि इसकी सप्लाई लगातार बनी रहे।

इसके साथ ही फोर्ड के कई डीलरशिप स्टॉक क्लियरेंस सेल्स ऑफर कर रहे हैं, इसके लिए सीधे आप डीलरशिप से संपर्क कर सकते हैं। डीलरशिप भारी छूट भी प्रदान कर रही है और इनके मॉडल्स को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। बतातें चले कि देश में Ford के 170 डीलर्स है और कुल 391 डीलरशिप है, इनके डीलर्स के पास 1000 कार के स्टॉक मौजूद है।

जानकारी के अनुसार बीते 10 सालों में Ford India को भारत में 2 बिलियन डॉलर तक का घाटा हो चुका है। इन डीलरशिप को स्थापित करने के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। यह संभावना नहीं है कि डीलर इस तरह के महत्वपूर्ण निवेश की वसूली कर पाएंगे।

FADA ने यह भी बताया है कि लगभग 40 हजार कर्मचारी Ford के डीलरशिप पर कार्यरत हैं। डीलरों ने प्रमुख बैंकों से अपनी इन्वेंट्री के लिए करीब 150 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। इससे डीलरों की आर्थिक स्थिति और भी जटिल हो जाती है। डीलरों के पास कई डेमो वाहन भी हैं। अब इनका क्या होगा यह कहा नहीं जा सकता है।

कंपनी ने 30,000 यूनिट ईकोस्पोर्ट कारों को एक्सपोर्ट करने का कमिटमेंट दिया है जिसे इस साल के अंत तक पूरा करना है। कंपनी चेन्नई में ईकोस्पोर्ट मॉडल बनाती है, जबकि फिगो और एस्पायर मॉडल सानद में बनाए जाते हैं। फोर्ड इंडिया का चेन्नई संयंत्र अमेरिका में बेचे जाने वाले इकोस्पोर्ट मॉडल का एकमात्र निर्माता है।

यहां बनाए जाने वाले एस्पायर और फिगो मॉडल को मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका में भी बेचा जाता है। पहले फोर्ड इंडिया चेन्नई में एंडेवर मॉडल बनाती थी लेकिन उसने हाल ही में उत्पादन बंद कर दिया। फोर्ड इंडिया ने एशिया क्षेत्र (चीन को छोड़कर), मध्य पूर्व और अफ्रीका में बेचे जाने वाले रेंजर मॉडल के इंजन निर्माण लिए सानद फैक्ट्री का संचालन जारी रखने का फैसला किया है।

ड्राइवस्पार्क के विचार
Ford के डीलर्स कम होने से ग्राहकों को अब और भी बहुत परेशाकानी होने वाली है, हालांकि कई डीलर्स खुद से कंपनी फ़्रैन्चाइज छोड़ने जा रहे हैं और किसी अन्य वाहन कंपनी का हाथ थाम सकते हैं। ऐसे में अब फोर्ड के नए वाहन खरीदना और भी मुश्किल हो जाएगा।


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