Fastag Lanes At Yamuna Expressway: यमुना एक्सप्रेसवे में 15 फरवरी से होंगे केवल फास्टैग लेन
अगर आप बिना जुर्माना भरे दिल्ली से आगरा यमुना एक्सप्रेसवे पर सफर करना चाहते हैं तो जल्द ही अपनी गाड़ी में फास्टैग लगवा लें, क्योंकि 15 फरवरी से देश में फास्टैग आधारित टोल कलेक्शन को अनिवार्य किया जा रहा है। यमुना एक्सप्रेस पर चलने वाले सभी वाहनों से इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन के माध्यम से टोल टैक्स वसूला जाएगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने देश में 15 फरवरी से फास्टैग को लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है।

यमुना एक्सप्रेसवे पर सभी टोल बूथ पर फास्टैग लेन का निर्माण कर लिया गया है और उपकरणों को जांचा जा रहा है। दिल्ली-आगरा यमुना एक्सप्रेसवे पर हर दिन करीब 40,000 वाहन गुजरते हैं, इनमें हल्के और भारी, दोनों तरह के वाहन शामिल हैं। इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन की व्यवस्था न होने टोल बूथ पर अक्सर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है।

हालांकि, फास्टैग के लागू होने के बाद अब उम्मीद है कि एक्सप्रेसवे पर लगने वाले जाम से निजात मिल सकेगा। बता दें कि फास्टैग को 1 जनवरी से ही लागू किया जाना था, लेकिन कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए सरकार ने इसे लागू करने की तिथि को आगे बढ़ा दिया।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की एक तजा रिपोर्ट के अनुसार टोल टैक्स का भुगतान करने वाले 75-80 प्रतिशत वाहनों में फास्टैग का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार ने 1 अप्रैल 2021 से नए वाहन का रजिस्ट्रेशन कराते समय फास्टैग लेना अनिवार्य कर दिया है।

देशभर में दिसंबर 2020 में 13.84 करोड़ फास्टैग ट्रांजैक्शन हुए हैं, जिसमें 2,303.79 करोड़ रुपये का टोल टैक्स कलेक्ट किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में 2.30 करोड़ फास्टैग उपयोगकर्ता हैं।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण टोल संग्रह को पूरी तरह से कैशलेस बनाने के प्रयास में लगी है। इसके लिए देश के सभी टोल बूथ में फास्टैग आधारित टोल कलेक्शन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है।

केंद्र सरकार की मौजूदा रणनीति के अनुसार नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे का काफी तेजी से डिजिटलीकरण किया जा रहा है। केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन भी शामिल है। इस परियोजना में देश के सभी टोल प्लाजा को 100 प्रतिशत कैशलेस किया जा रहा है।

देश के सभी टोल प्लाजा पर डेडिकेटेड फास्टैग लेन भी बनाए गए हैं। फास्टैग एक डिजिटल स्टीकर है जिसे गाड़ियों के शीशे पर लगाया जाता है। यह रेडियो फ्रिक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन टेक्नोलॉजी पर काम करती है। जब गाड़िया टोल प्लाजा से गुजरती हैं तब फास्टैग से जुड़े बैंक या प्रीपेड अकाउंट से अपने आप ही टोल टैक्स का भुगतान हो जाता है।

इससे गाड़ियों को टोल पलजा पर रुक कर टोल भुगतान करने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे समय की बचत होती है साथ ही प्रदूषण भी कम होता है। 100 प्रतिशत टोल कलेक्शन लागू होने के बाद गाड़ियां टोल प्लाजा पर नहीं रुकेंगी जिससे जाम की स्थिति से भी निजात पाया जा सकेगा।

फास्टैग जारी करने का काम बैंकों और पॉइंट-ऑफ-सेल केंद्रों को सौंपा गया है। फास्टैग को ट्रांसपोर्ट ऑफिस से भी ख़रीदा जा सकता है। फास्टैग लेने के लिए आपको केवाईसी और व्हीकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट देना होगा। फास्टैग अमेजन और पेटीएम पर ऑनलाइन भी खरीदा जा सकता है।

बता दें कि फास्टैग लेन में चल रहे बिना फास्टैग वाले वाहनों से दंड के रूप में दोगुना टोल टैक्स वसूल करने का प्रावधान है। यह इसलिए क्योंकि फास्टैग उपयोगकर्ताओं को लेन में इंतजार न करना पड़े और ट्रैफिक जाम की समस्या न हो।

फास्टैग के आने के बाद टोल कलेक्शन में दिनों दिन वृद्धि हो रही है। फास्टैग का प्रयोग सुरक्षा और वाहन की ट्रैकिंग के उद्देश्य से भी किया जा रहा है। इसमें सरकार के पास टोल प्लाजा से गुजरने वाली हर गाड़ी का रिकॉर्ड होगा।


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