छोटी कारों में भी स्टैंडर्ड तौर पर होने चाहिए 6 एयरबैग, Nitin Gadkari ने कार कंपनियों से की अपील
केंद्रीय परिवहन मंत्री Nitin Gadkari ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा कि भारत में छोटी या एंट्री लेवल की कारें जिन्हें ज्यादातर निम्न-मध्यम वर्ग के लोगों द्वारा खरीदा जाता है, उन्हें भी सुरक्षा के लिए पर्याप्त संख्या में एयरबैग की आवश्यकता होती है और उन्होंने इस बारे में कार निर्माताओं से अपील भी की है।

उन्होंने सभी वाहन निर्माताओं से छोटी इकॉनमी कारों के सभी वेरिएंट और सेगमेंट में कम से कम छह एयरबैग उपलब्ध कराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि छोटी इकोनॉमी कारों में अधिक एयरबैग के लिए उनकी अपील सुरक्षा सुनिश्चित करने और दुर्घटनाओं के मामलों में संभावित मौतों को रोकने के लिए थी।

हालांकि उन्होंने यह बात भी स्वीकार की है कि छोटी कारों में अतिरिक्त एयरबैग से कार निर्माताओं की लागत कम से कम 3,000 से 4,000 रुपये तक बढ़ जाएगी, लेकिन उन्होंने कहा कि "हमारे देश में, गरीबों को भी सुरक्षा मिलनी चाहिए (सड़क दुर्घटनाओं के मामले में)।"

उन्होंने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि क्यों कार निर्माता केवल अमीर लोगों द्वारा खरीदी जाने वाली बड़ी कारों में आठ एयरबैग प्रदान कर रहे हैं?, उन्होंने कहा कि, "अमीर लोगों के लिए, आप (ऑटो निर्माता) आठ एयरबैग की पेशकश करते हैं और निम्न मध्यम वर्ग के लोगों द्वारा उपयोग की जाने वाली कारों के लिए, आप केवल दो-तीन एयरबैग ही पेश करते हैं।"

उनकी टिप्पणी ऑटोमोबाइल उद्योग की पृष्ठभूमि के खिलाफ आई है, जिसमें उन्होंने चिंता जताई है कि वाहनों के लिए उच्च कराधान, सख्त सुरक्षा और उत्सर्जन मानदंडों ने उनके उत्पादों को महंगा बना दिया है। इस साल जून में, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मौजूदा कार मॉडलों में डुअस फ्रंट एयरबैग की अनिवार्यता की समय सीमा चार महीने बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2021 कर दी थी।

बता दें कि इस समय सीमा को कोरोनोवायरस महामारी के चलते बढ़ा दिया गया था। नए मॉडलों के लिए 1 अप्रैल, 2021 से नियम पहले से ही अनिवार्य कर दिया गया था। मौजूदा मॉडलों के लिए, वर्तमान में केवल ड्राइवर की सीट एयरबैग अनिवार्य है।

आपको बता दें कि भारत सरकार ने मार्च में कारों में पैसेंजर सेफ्टी को बढ़ावा देने के लिए भारत में निर्मित और बेची जाने वाली सभी कारों में फ्रंट रो में डुअल एयरबैग के अनिवार्य प्रावधान की घोषणा की थी। इसके अलावा दिल्ली सरकार वाहनों से बढ़ रहे प्रदूषण को कम करने पर भी काम कर रही है।

दिल्ली सरकार ने राज्य में वैद्य पीयूसी सर्टिफिकेट (Pollution Under Control Certificate) को अनिवार्य कर दिया है। अब बगैर वैद्य पीयूसी के वाहन चलाते पकड़े जाने पर 10,000 रुपये का जुर्माना लग सकता है। यही नहीं, अगर वाहन का वैद्य पीयूसी नहीं करवाया है तो 6 महीने की जेल या 3 महीने तक ड्राइविंग लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है।


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