EV Sector Expectation From Budget 2021: जानें ई-मोबिलिटी सेक्टर को नए बजट से क्या हैं उम्मीदें
अब से कुछ ही घंटों के इंतजार के बाद बजट सत्र की शुरुआत होने जा रही है। आपको बता दें कि तमाम सेक्टर्स के साथ ही इस बार ऑटोमोबाइल सेक्टर को भी बजट से काफी ज्यादा उम्मीदें हैं। हाल ही में कार कंपनियों ने बढ़ी हुई इनपुट लागत और बीएस-6 मानकों के चलते अपनी कारों की कीमत में इजाफा किया है। ऐसे में ऑटो सेक्टर को बजट में वाहन निर्माण की लागत में कमी किए जाने की उम्मीद है।

डीजल और पेट्रोल वाहनों के साथ ही भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को भी जमकर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। आपको बता दें कि इलेक्ट्रिक वाहन अभी भी आम आदमी की पहुंच से काफी दूर हैं। ये मोबिलिटी का एक साफ सुथरा विकल्प हैं और इन्हीं पर देश का भविष्य भी टिका है।

ऐसे में इनकी कीमत में कटौती भी की जा सकती है। बजट 2021 से मारुति और टोयोटा जैसी बड़ी कंपनियों के साथ ही नई स्टार्टअप कंपनियों को काफी उम्मीदें है।

टोयोटा का कहना है कि केंद्र सरकार को इस बजट में वाहन स्क्रैपेज नीति को लागू करना चाहिए। कंपनी का कहना है कि स्क्रैपेज नीति से प्रदूषण करने वाले पुराने वाहनों को बाजार से हटाने और नए वाहनों के लिए बाजार में मांग को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।

टोयोटा ने उम्मीद जताई है कि सरकार बजट में निवेश नीति को लचीला बना सकती है जिससे देश में नई कंपनियों को आगे बढ़ने और व्यापर करने में आसानी होगी। इसके अलावा टोयोटा ने आयातित वाहनों पर लगने वाले टैक्स में कटौती करने का भी परामर्श दिया है।

इलेक्ट्रिक स्कूटर निर्माता कंपनी एथर का मानना है कि केंद्र सरकार को इस बजट में इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और कच्चे माल पर जीएसटी को कम करना चाहिए।

कंपनी का यह भी मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर इनकम टैक्स में छूट का विकल्प देना चाहिए जिससे ग्राहकों को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के प्रेरणा मिलेगी।

इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली एक और कंपनी ग्रीव्स मोटर्स का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति जागरूकता के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाने की जरूरत है। सरकार को अपने स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों के फायदों और भविष्य में उनकी आवश्यकता पर जनता से चर्चा करनी चाहिए।

कंपनी ने बताया कि इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर लोगों के बीच काफी गलतफहमी फैली हुई है। अधिकतर लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को कम भरोसेमंद मानते हैं। इसके अलावा देश में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी भी इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने से रोक रही है।

कई छोटी और बड़ी कंपनियों का मानना है कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश में ही इलेक्ट्रिक उपकरणों के उत्पादन पर नीति तैयार होनी चाहिए। चिप, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, इलेक्ट्रिक मोटर, कॉयल समेत कई उपकरणों के लिए कंपनियां चीन पर निर्भर है। इस क्षेत्र में घरेलू कंपनियों को जरूरी सहायता प्रदान कर उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है।


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