Using Rear View Mirror Is Mandatory: रियर व्यू मिरर और रियर सीट बेल्ट न होने पर कटेगा चालान, जानें
सड़क सुरक्षा में सुधार करने ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए दिल्ली पुलिस शहर में अभियान चला रही है। इस अभियान के तहत कार में पीछे बैठ कर सीट बेल्ट का इस्तेमाल न करने वाले यात्रियों और बाइक में रियर व्यू मिरर का इस्तेमाल न करने वालों पर ट्रैफिक पुलिस जुर्माना लगाएगी। मोटर वाहन अधिनियम 1989 के तहत कार चलाते समय कार में बैठे सभी लोगों को सीट बेल्ट का इस्तेमाल करना अनिवार्य है।

वहीं, बाइक में रियर व्यू मिरर का इस्तेमाल करना अनिवार्य है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि अक्सर दोपहिया वाहन चालक अपनी बाइक या स्कूटर से रियर व्यू मिरर हटवा लेते हैं जो सड़क पर बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। बाइक पर रियर व्यू मिरर न होने से पीछे से आ रहे वाहन का पता नहीं चलता और ऐसे में दुर्घटनाएं होती हैं।

पुलिस ने बताया है कि पिछले साल कई ऐसे मामले आए हैं, जिसमे बाइक चालक रियर व्यू मिरर न होने के कारण दुर्घटना के शिकार हुए हैं। दरअसल, रियर व्यू मिरर से हम अपने पीछे से आ रहे वाहन का पता लगा सकते हैं, अगर यह न हो तो हमे पीछे से आ रहे वाहन का पता नहीं चलता और हम बिना सोचे समझे अपनी गाडी मोड़ लेते हैं जिससे दुर्घटनाएं होती हैं।

पुलिस ने बताया कि अक्सर कार के पीछे बैठे लोग सीटबेल्ट नहीं लगाते हैं। कार ड्राइव करते समय पीछे बैठे लोगों को सीट बेल्ट लगाना उतना ही जरूरी है जितना ड्राइवर को लगाना। सड़क हादसे के समय सीट बेल्ट लगाने वाले लोग गंभीर चोट से बच सकते हैं जबकि सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करने वालों को ज्यादा नुकसान होने की सम्भावना होती है।

पूर्वी दिल्ली पुलिस 13 से 23 जनवरी तक ट्रैफिक नियम जागरूकता अभियान चला रही है। इस अभियान के दौरान कारों में सीटबेल्ट और बाइक में रियर व्यू के इस्तेमाल को जांचा जा रहा है। नियम का उल्लंघन करने वालों पर पुलिस मोटर वाहन कानून (1989) के तहत जुर्माना भी लगा रही है।

बता दें कि दिल्ली में वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) के इस्तेमाल को भी अनिवार्य किया गया है। हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट का इस्तेमाल नहीं करने वाले वाहनों की भी धर-पकड़ की जा रही है।

हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट दिखने में एक साधारण नंबर प्लेट से के जैसा ही होता है लेकिन इसकी तकनीकी विशेषताएं इसे अलग बनाती हैं। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट में क्रोमियम होलोग्राम स्टीकर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमे वाहन से संबंधित जानकारी जैसे रजिस्ट्रेशन नंबर, इंजन नंबर, चेसिस नंबर आदि अंकित होती है।

वाहन पर एक बार यह नंबर प्लेट लग जाये तो इसे निकालना आसान नहीं होता। नंबर प्लेट को हॉट स्टाम्पिंग के जरिये वाहन पर लगाया जाता है, निकालने की कोशिश करने पर यह टूट जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार 1 अप्रैल 2019 के पहले खरीदे गए वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगवाना अनिवार्य है, जबकि इसके बाद खरीदे गए वाहन अब नए नंबर प्लेट के साथ ही आ रहे हैं।


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