Crude Oil Rates Drop By 10 Percent: कच्चे तेल की कीमत में आई 10 प्रतिशत की गिरावट, पेट्रोल हो सकता है सस्ता
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम होने की संभावना है क्योंकि पिछले 15 दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत की गिरावट आई है। मांग में कमी के कारण इस महीने की शुरुआत में कच्चे तेल की दरें 71 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 64 डॉलर प्रति बैरल रह गई हैं। यूरोपीय शहर बढ़ते कोविड-19 मामलों के कारण गतिशीलता पर प्रतिबंध लगा रहे हैं जिससे ईंधन की मांग में कमी आ रही है, जिसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमत में गिरावट आ रही है।

चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार 24 दिनों से स्थिर हैं। हालांकि, इससे लोगों का ज्यादा लाभ नहीं मिला है क्योंकि ईंधन की कीमतें पजल ही आसमान छू चुकी हैं। वहीं कच्चे ईंधन दरों में गिरावट के बाद तेल कंपनियां ईंधन की कीमत कम कर उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचा सकती हैं।

तेल की कीमत बढ़ने से फरवरी में मांग में कमी देखी गई है। डीजल की मांग, जो देश की तेल की मांग का लगभग 40 प्रतिशत तक है, उसमें 8.5 प्रतिशत तक की जिरावत कर्ज की गई है। दूसरी ओर, पेट्रोल की बिक्री में भी 6.5 प्रतिशत की गिरावट आई है।

मुंबई में मंगलवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्रमशः 97.57 रुपये प्रति लीटर और 88.60 रुपये प्रति लीटर हैं। दिल्ली में, प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्रमशः 91.17 रुपये और 81.47 रुपये हैं। तेल की कीमतों में अंतिम संशोधन 27 फरवरी की की गई थी।

केंद्रीय बजट के बाद फरवरी 2021 की शुरुआत से तेल कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में 14 गुना बढ़ोतरी की है। राष्ट्रीय राजधानी में प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल के दाम क्रमशः 4.22 रुपये और 4.34 रुपये बढ़ाए गए हैं। पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में 2021 में कुल 26 बार संशोधन किया गया है।

पेट्रोल की कीमत में 7.46 रुपये प्रति लीटर और बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन 2021 में डीजल की लागत में 7.60 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है, जिससे उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ गया है।

राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे के कई शहरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये का आंकड़ा पार कर गई। तेल की कीमत में राज्य और केंद्र सरकार, दोनों के टैक्स शामिल हैं। ईंधन की कीमत में लगभग 60 प्रतिशत का टैक्स लगाया जाता है। जबकि कुछ राज्य सरकारों ने उपभोक्ताओं को कुछ राहत देने के लिए अपने करों में मामूली कटौती की घोषणा की है।

वहीं केंद्र सरकार अभी तेल की कीमत में कटौती करने के पक्ष में नहीं है। पेट्रोल और डिएसल की कीमतों को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए मांग तेज हो रही है। हालांकि, ऐसा कोई भी कदम केंद्र और राज्य सरकारों की सहमति से ही संभव है।


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