Maruti Suzuki को लगा झटका, CCI ने लगाया 200 करोड़ रुपये का जुर्माना, जानें क्या है मामला
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) पर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग यानी सीसीआई (CCI) ने अनुचित व्यापार व्यवहार में शामिल होने पर 200 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। बता दें कि सीसीआई सभी क्षेत्रों में अनुचित व्यावसायिक व्यवहारों पर रोक लगाता है।

आरोपों के मुताबिक, मारुति सुजुकी इंडिया ने डीलरों को कारों में दी जाने वाली छूट को सीमित करने पर बाध्य किया। इससे डीलरों के बीच प्रतिस्पर्धा कम हो गई और इसका खामियाजा ग्राहकों को उठाना पड़ा। डीलर अपनी तरफ से ग्राहकों को डिस्काउंट देते हैं जिससे उनके बीच प्रतिस्पर्धा बानी रहती है और ग्राहकों को कम कीमत पर कार लेने का फायदा होता है।

सीसीआई ने 2019 में आरोपों की जांच शुरू की थी और उस पर अब फैसला देते हुए 200 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड पर छूट नियंत्रण नीति लागू करके प्रतिस्पर्धा-विरोधी आचरण में लिप्त होने के लिए 200 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।

प्रतिस्पर्धा आयोग ने ऑटोमेकर को डीलर छूट से संबंधित प्रतिस्पर्धा-विरोधी नियमों को "बंद करने और रोकने" और 60 दिनों के भीतर जुर्माना जमा करने के लिए कहा है।

2019 में, प्रतिस्पर्धा नियामक ने इन आरोपों पर गौर करना शुरू किया कि मारुति सुजुकी अपने डीलरों को उनके द्वारा दी जाने वाली छूट को सीमित करने के लिए मजबूर कर रही है। जांच में सामने आया कि मारुति ने डीलरों के बीच प्रतिस्पर्धा को प्रभावी ढंग से रोकने और डीलरों को स्वतंत्र रूप से संचालन करने में बाधा उत्पन्न की। इससे उन उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचा जो कम कीमत का फायदा उठा सकते थे।

सीसीआई ने पाया कि मारुति ने अपने डीलरों के साथ एक समझौता किया था, जिसके तहत उन्हें ग्राहकों को कंपनी द्वारा निर्धारित छूट से अधिक छूट देने से रोक दिया गया था। दूसरे शब्दों में, मारुति के पास अपने डीलरों के लिए एक 'छूट नियंत्रण नीति' थी, जिसके तहत डीलरों को मारुति द्वारा उपभोक्ताओं को अतिरिक्त छूट, मुफ्त उपहार आदि देने से रोक दिया गया था। यदि कोई डीलर अतिरिक्त छूट की पेशकश करना चाहता है, तो मारुति की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य थी।

यह भी पाया गया कि मारुति सुजुकी कंपनी ने डीलरशिप पर ग्राहकों के रूप में जाने के लिए मिस्ट्री शॉपिंग एजेंसियों (एमएसए) को नियुक्त किया था। जिससे ये पता लगाया जा सके कि क्या ग्राहकों को कोई अतिरिक्त छूट दी जा रही है।


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