अब चिप की कमी के चलते BMW अपने कारों से हटा टचस्क्रीन फंक्शन, यह मॉडल्स होंगी प्रभावित
दुनिया भर के कार निर्माता चिप की कमी से जूझ रहे हैं और ऐसे में BMW ने एक बड़ा निर्णय लिया है। BMW अस्थायी तौर पर अपने कुछ मॉडल्स से टचस्क्रीन फंक्शन के हटाने वाली है। कार निर्माता पिछले कुछ महीनों से चिप की कमी से जूझ रहे हैं, इस वजह से कार की डिलीवरी में लगातार देरी हो रही है और सिर्फ कुछ उपकरण की वजह से कारों की डिलीवरी नहीं हो पा रही है।

इस वजह से दुनिया भर में कार बिक्री प्रभावित हुई है। BMW ने इससे निपटने का अपना ही तरीका निकाला है और वर्तमान उत्पादन स्तर को बनाये रखने के लिए कई मॉडल्स में टचस्क्रीन फंक्शन को हटा रही है। इसके बिना ही कंपनी अपने मॉडल्स की डिलीवरी कर रही है, बीएमडब्ल्यू वर्तमान में कंपनी 3 सीरिज, एक्स5, एक्स6, एक्स7 व जेड4 जैसे मॉडल्स को बिना टचस्क्रीन के भेजने वाली है।

इसके साथ ही बीएमडब्ल्यू 4 सीरिज कूपे, कन्वर्टिबल व ग्रेन कूपे (लेकिन आई4 ईवी नहीं) में कुछ समय के लिए टचस्क्रीन फीचर को हटाने वाली है। ऐसे में जिन कारों में यह फंक्शन नहीं दिया जा रहा है उन ग्राहकों में इंफोटेनमेंट सिस्टम को चलाने के लिए सेंटर कंसोल के आईड्राइव कंट्रोलर का उपयोग करना होगा। वहीं जिन ग्राहकों में यह टचस्क्रीन नहीं होगा उन्हें कंपनी 500 डॉलर वापस देनी होगी।

इसके साथ ही एक और फीचर नहीं होगा, जब ग्राहक पार्किंग असिस्टेंस पैकेज का चुनाव करेंगे तो बीएमडब्ल्यू बैकअप असिस्टेंट भी नहीं मिलेगा। इस फीचर की मदद से कार जिस रास्ते से वापस आई है उस रास्ते में अपने आप रिवर्स हो जाती है। अब इस कार के ग्राहकों को इसके भी पैसे मिलेंगे या नहीं इस बारें में कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई है।

सेमीकंडक्टर चिप्स ऑटोमोबाइल उद्योग का एक अनिवार्य हिस्सा बन गए हैं और हाल के दिनों में वाहनों में इसका उपयोग विश्व स्तर पर बढ़ा है। नए वाहन तेजी से अधिक से अधिक इलेक्ट्रॉनिक सुविधाओं से लैस होते जा रहे हैं। ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, ड्राइवर-सहायता सुविधाएँ, नेविगेशन उपकरण और हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक सिस्टम, जिनमें से सभी को इन चिप्स की आवश्यकता होती है।

बता दें कि वैश्विक कार निर्माताओं के साथ भारतीय कार कंपनियां भी सेमीकंडक्टर की कमी से जूझ रही हैं। भारत में मारुति सुजुकी के अलावा, टाटा मोटर्स, महिंद्रा, टोयोटा जैसी बड़ी कंपनियां सेमीकंडक्टर (चिप) कमी का सामना कर रही हैं। इसके चलते नई गाड़ियों के लिए वेटिंग पीरियड बढ़ रहा है और त्योहारी सीजन भी भारी प्रभावित हुआ है।

चिप की कमी को दूर करने के लिए कंपनियां अपने उत्पादों में बदलाव करने के साथ सीधे सेमीकंडक्टर निर्माताओं से चिप खरीद तरीका अपना रही हैं। इसके अलावा कंपनियां चिप में बदलाव करके या उसके जगह अन्य चिप का इस्तेमाल करके चिप की कमी से निपट रही है, आने वाले महीनों तक यह समस्या बनी रह सकती है।

वैश्विक ऑटोमोबाइल उद्योग में इलेक्ट्रॉनिक चिप की कमी के चलते वाहनों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। मौजूदा समय में इलेक्ट्रॉनिक चिप की कमी के कारण यूरोप, अमेरिका, और एशिया के देशों में वाहन निर्माण धीमी गति से हो रहा है। ऐसे में नई कार का इंतजार कर रहे ग्राहकों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

ड्राइवस्पार्क के विचार
कारों की बिक्री को सामान्य बनाये रखने के लिए अब बीएमडब्ल्यू ने यह बड़ा निर्णय लिया है। ऐसा ही कुछ समय पहले महिंद्रा ने किया था, अपने कारों को बिना टचस्क्रीन के डीलरशिप भेज रही थी लेकिन ऐसा बंद कर दिया गया। ऐसे में देखना होगा कि कंपनी को कैसी प्रतिक्रिया मिलती है।
Source: Edmunds


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