ये कंपनी खरीद सकती है मारुति की 10,000 इलेक्ट्रिक कारें, लेकिन रखी ये शर्त
भारत की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक राइड हेलिंग कंपनी, ब्लूस्मार्ट मोबिलिटी (BluSmart Mobility) ने आने वाले वर्षों के लिए अपनी योजनाओं का खुलासा किया है। 2025 तक, कंपनी ने अपने बेड़े और संचालन का विस्तार करने के लिए लगभग 1 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है। जिसके तहत कंपनी अपने बेड़े में 1 लाख से अधिक वाहन को शामिल करेगी जो अभी केवल 685 यूनिट हैं।

हालांकि, कंपनी का कहना है कि अपने बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करने में आने वाली सबसे बड़ी चुनौती ईवी फोर-व्हीलर स्पेस में सीमित संख्या में किफायती विकल्प हैं, इसीलिए ब्लूस्मार्ट मोबिलिटी के संस्थापक और सीईओ अनमोल सिंह जग्गी इलेक्ट्रिक मारुति सुजुकी वैगनआर जैसी सस्ती कारों की तलाश में हैं।

जग्गी का कहना है कि अगर उन्हें मारुति सुजुकी वैगनआर जैसी कार इलेक्ट्रिक मॉडल में किफायती कीमत पर मिले तो वे एक बार में 10,000 यूनिट खरीद सकते हैं। हालांकि, उनका कहना है कि कारों की कीमत प्रति यूनिट 6 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।

मारुति सुजुकी भारत में पिछले तीन वर्षों से वैगनआर ईवी का परीक्षण कर रही है, लेकिन कंपनी सीएनजी और फ्लेक्स ईंधन वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों से ज्यादा प्राथमिकता दे रही है। मारुति वैगनआर ईवी को 2025 से पहले लॉन्च करने की योजना नहीं है। ब्लूस्मार्ट चालू वित्तीय वर्ष में अपनी फ्लीट में 2000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक कारों को शामिल करेगी।

इसके लिए कंपनी ने टाटा मोटर्स के साथ 3,500 इलेक्ट्रिक कारों की खरीद के लिए एक खरीद सौदे पर हस्ताक्षर किया है। भारत में किफायती इलेक्ट्रिक कारों की बात करें तो, टाटा टिगोर ईवी और नेक्सन ईवी ही दो सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक कारें हैं। जिनकी कीमत क्रमशः 12 लाख रुपये और 14.24 लाख से शुरू होती है। हालांकि, ब्लूस्मार्ट मोबिलिटी इससे आधी कीमत पर इलेक्ट्रिक कार की तलाश कर रही है।

ब्लूस्मार्ट मोबिलिटी ने आक्रामक तरीके से फंड जुटाने की योजना तैयार की है और अगले कुछ महीनों में कंपनी दिल्ली-एनसीआर से आगे बढ़कर दो नए टियर 1 शहरों में प्रवेश करेगी। अब, इस तथ्य के अलावा कि पारंपरिक फ्लीट कार बाजार में किफायती दहन इंजन से चलने वाले वाहन उपलब्ध हैं, उनमें से अधिकांश सीएनजी पर चलते हैं जो चलाने के लिए मितव्ययी है और सीएनजी टियर 1 बाजारों में आसानी से उपलब्ध है।

इलेक्ट्रिक वाहनों के मामले में पर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और रेंज की चिंता अभी भी एक बड़ी खामी है। अगर ब्लूस्मार्ट मोबिलिटी 6 लाख रुपये में इलेक्ट्रिक कार खरीदती है तो, वह ग्राहकों से प्रति किलोमीटर 9 से 10 रुपये का शुल्क लेगी। लेकिन अगर कंपनी इलेक्ट्रिक कारों को 11-12 लाख रुपये की ऊंची लगत पर खरीदती है तो उसे अपने ग्राहकों से 17 से 19 रुपये प्रति किमी का शुल्क लेना होगा। जो कि पेट्रोल या डीजल चालित वाहनों के लिए कैब एग्रीगेटर द्वारा वसूले जाने वाले किराये के बराबर या उससे अधिक होगी।

अगर इलेक्ट्रिक कार महंगी होगी तो उसकी ईएमआई भी महंगी होगी। वाहनों की लागत की ऊंची कीमत भविष्य में कंपनी के व्यवसाय और विस्तारीकरण के लिए बाधा बन सकती है।


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