Apple ला रही है इलेक्ट्रिक कार, वायलेस चार्जिंग और फ्यूल सेल तकनीक से होगी लैस
मशहूर स्मार्टफोन कंपनी एप्पल बहुत जल्द इलेक्ट्रिक कार लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। नोबेल पुरस्कार विजेता और लिथियम-आयन बैटरियों के पीछे अग्रणी, अकीरा योशिनो ने कहा है कि Apple 2021 तक ऑटोमोटिव स्पेस में अपने प्रवेश की घोषणा कर सकता है। जापान के वैज्ञानिक योशिनो ने लिथियम आयन बैटरी में रसायन विज्ञान के लिए 2019 में नोबेल पुरस्कार जीता था। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों के भविष्य के बारे में बात की और उन्होंने कहा कि आईटी उद्योग तेजी से गतिशीलता की ओर देख रहा है।

अकीरा योशिनो के मुताबिक एप्पल 2025 में अपनी इलेक्ट्रिक कार लॉन्च कर सकती है। ऐसा करने के लिए कंपनी इसी साल इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में उतरने की घोषणा कर सकती है। एप्पल पहले भी इलेक्ट्रिक कार प्रोजेक्ट पर काम करने का खुलासा कर चुकी है। कंपनी 2014 से स्वचालित (autonomous) इलेक्ट्रिक कार के प्रोजेक्ट पर काम कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एप्पल एडवांस बैटरी तकनीक विकसित कर रही है और इलेक्ट्रिक कार के प्रोजेक्ट पर दक्षिण कोरियाई कार निर्माता हुंडई के साथ काम कर रही है। बताया जाता है कि एप्पल की आने वाली पहली इलेक्ट्रिक कार Canoo की E-GMP मॉडुलर प्लेटफॉर्म पर तैयार की जाएगी जो एक आधुनिक इलेक्ट्रिक कार प्लेटफॉर्म है।

Apple ने Canoo के सह-संस्थापक, Ulrich Krantz को भी काम पर रखा, जिन्होंने BMW को अपनी इलेक्ट्रिक कारों को विकसित करने में मदद की। इसमें वरिष्ठ भूमिकाओं में पोर्श और टेस्ला के पूर्व अधिकारी भी हैं और ऐप्पल वॉच के उत्पाद प्रमुख केविन लिंच में भी शामिल हैं, जो पहले परियोजना के लिए Adobe में सीटीओ थे।

जानकारी के अनुसार, एप्पल 2024-2025 के दौरान अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार बाजार में उतार सकती है, जिसका उत्पादन पहले शुरू होगा। हालांकि, जानकारों का मानना है कि ऑटोनोमस कार तकनीक में अभी एप्पल, टेस्ला और गूगल जैसी प्रतिद्वंदियों से काफी पीछे है। एप्पल की इलेक्ट्रिक कार प्रोजेक्ट को अभी परिक्षण के कई दौर से गुजरना है।

एप्पल की कारों में हो सकता है फ्यूल सेल का इस्तेमाल
रिपोर्ट के मुताबिक, एप्पल प्रारंभिक चरण में अपनी इलेक्ट्रिक कार में लिथियम आयन बैटरी का इस्तेमाल करेगी। हालांकि, प्रोजेक्ट के अगले चरण में कारों को फ्यूल सेल पर भी चलाने की योजना है। एप्पल ऐसी तकनीक विकसित कर रही है जिससे कारों में लगने वाली बैटरी बिना किसी चार्जर के वायरलेस तरीके से ही चार्ज हो जाए।

कारों को वायरलेस चार्ज करने के लिए भविष्य में पार्किंग लॉट में वायरलेस चार्जिंग की सुविधा दी जाएगी। यहां तक कि, सड़कों की ऐसी तकनीक से बनाया जाएगा जहां कार चलते-चलते ही चार्ज हो जाएगी।

2030 से फ्यूल सेल वाली करें होगी सस्ती
मौजूदा समय में फ्यूल सेल कारें अपने विकास के प्रारंभिक चरण में है और इनका इस्तेमाल काफी सीमित है। फ्यूल सेल कारें काफी कम संख्या में बनाई जाती हैं इसलिए इनकी कीमत पेट्रोल-डीजल कारों के मुकाबले काफी अधिक है। हालांकि, भविष्य में तकनीकी विकास के कारण इनका इस्तेमाल सामान्य रूप से किया जाने लगेगा। फ्यूल सेल तकनीक पर काम कर रहे वैज्ञानिकों का मानना है कि 2030 के बाद फ्यूल सेल कारों की पहुंच एक आम नागरिक तक होगी।


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