छूट के बावजूद वाहन कंपनियां के सामने है उत्पादन शुरू करने की चुनौती, आ रही यह समस्याएं
देश में करीब एक महीने से लॉकडाउन लागू है जिस वजह से ऑटो जगत सहित सभी फैक्ट्रियां बंद रखी गयी थी, लेकिन अब सरकार वाहन कंपनियों को काम आंशिक रूप से फिर से शुरू करने की इजाजत दे रहे है, हालांकि सामने आई चुनौती इससे बड़ी है।

देश भर में हॉट स्पॉट से बाहर स्थित वाहन कंपनियों को स्थानीय प्रशासन काम शुरू करने की अनुमति दे रहे है। वाहन कंपनियां भी जल्द से जल्द उत्पादन शुरू करने का बेसब्री से इंतजार कर रहे है ताकि घाटे को कम से कम किया जा सके।

लेकिन कार व बाइक उत्पादन के लिए ढेर सारे पार्ट्स निर्माता कंपनियों से आपूर्ति की आवश्यकता है लेकिन अभी तक कई पार्ट्स निर्माता को काम शुरू करने की अनुमति नहीं मिली है तो कई लोग धीरे धीरे काम शुरू कर रहे है।

पिछले एक महीने से काम बंद होने की वजह से कंपनियों के पास भी कोई स्पेयर पार्ट्स नहीं है तथा पार्ट्स निर्माताओं के सतत सप्लाई के बिना उत्पादन शुरू करना तथा इसे लगातार जारी रखना बड़ी मुश्किल है, जिस वजह से अभी तक वाहन कंपनियां उत्पादन शुरू करने से हिचक रही है।

वाहन निर्माण भी एक लंबी शृंखला है तथा यह कोई कॉम्पैक्ट काम नहीं है जिसे एक ही जगह पर पूरा किया जा सके। वाहन निर्माण करने के लिए कई तरह के भाग का काम करना तथा पूर्ण रूप से संचालित करना जरुरी है, जो कि वर्तमान में बहुत ही कठिन काम है।

यह तो रही पार्ट्स की बात, इसके साथ ही कोरोना के फैलते संक्रमण के बीच वाहन फैक्ट्री में कर्मचारियों का सतत अंतराल में थर्मल स्क्रीनिंग तथा सैनेटाईजेशन भी जरुरी है। कर्मचारियों की संख्या हजारों में रहती है ऐसे में हर दो तीन घंटे में यह कार्य करना बहुत ही कठिन काम है।

इसके साथ ही अगर कंपनियां वाहन उत्पादन शुरू कर भी दे तो वर्तमान में डीलरशिप बंद है जिस वजह से कंपनियां वाहन की बिक्री भी शुरू नहीं कर सकते है, ऐसे में वाहन कंपनियों द्वारा वाहन का उत्पादन शुरू करने का कोई मतलब नहीं बनता है।

हाल ही में मारुति सुजुकी, बजाज ऑटो सहित कई कंपनियों को अनुमति दी जा चुकी है। माना जा रहा है कि इस महीने भारतीय ऑटो जगत के इतिहास में पहली बार बिक्री शून्य रहने वाली है, यह आने वाले महीने में भी जारी रह सकता है।


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