परिवहन मंत्रालय आंशिक रूप से छुपाएगा वाहन मालिकों की जानकारी
देश का परिवहन मंत्रालय वाहनों के रजिस्टर्ड मालिकों की जानकारी के डाटाबेस को सुरक्षित करने और उनके नाम को आंशिक रूप से छिपाने के लिए काम कर रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि वाहन मालिकों की जानकारी आसानी से निकाली जा सकती है।

आपको बता दें कि इस डाटाबेस का इस्तेमाल दिल्ली में हो रही हिंसा में किया जा रहा है। कथित तौर पर इस डाटाबेस का इस्तेमाल करके चुनिंदा लोगों के वाहनों को नुकसान पहुंचाने की रिपोर्ट सामने आई है।

नई दिल्ली आधारित एक डिजिटल अधिकार वकालत संगठन, इंडियन फ्रीडम फाउंडेशन (आईएफएफ) के सदस्यों ने बुधवार को परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की है। उन्होंने नितिन गडकरी को डाटाबेस के गलत इस्तेमाल की संभावनाओं के बारे में बताया है।

इसके साथ ही उन्होंने मंत्रालय से इस बात का आग्रह किया है कि वाहन और सारथी के डाटाबेस को सुरक्षित किया जाए, जिससे पब्लिक और प्राइवेट एक्सेस को रोका जा सके।

नीति और आईएफएफ के लिए संसदीय वकील सिद्धार्थ देब ने नितिन गडकरी को दिए पत्र में लिखा कि "हमारा मानना है कि इस तरह से लक्ष्य बना कर की गई हिंसा, सार्वजनिक रूप से वाहन रजिस्ट्रेशन डाटा प्रकाशित करने से ही संभव है।"

आपको बता दें कि ज्यादातर मामलों में वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर डालकर इस डाटाबेस से वाहन मालिकों का पूरा नाम निकाला जा सकता है, जिससे उनके जाति और धर्म की जानकारी हो जाती है।

हांलाकि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस तरह के किसी भी उल्लघंन होने की बात से साफ इनकार कर दिया है। खासतौर पर दिल्ली में इस हफ्ते सामने आई घटनाओं को लेकर भी मंत्रालय ने इस बात से इनकार किया है।


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