Using Touchscreen While Driving Is Risky: कार चलाते समय टचस्क्रीन का इस्तेमाल करना है खतरनाक, जानें
आधुनिक समय की कारें अब दूसरों से अलग रहने और ध्यान खींचने के लिए कई प्रकार की सुविधाओं से लैस हैं। एक सामान्य विशेषता जो अब छोटी हैचबैक पर भी देखी जाती है, वह एक टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम है। यह एक प्रीमियम फीचर के रूप में शुरू हुआ और अब भारत और विदेशों में बिकने वाले लगभग सभी कारों पर उपलब्ध है।

हाल के एक शोध से पता चलता है कि यह टचस्क्रीन जो हम सभी अपनी कारों में दैनिक आधार पर उपयोग करते हैं, वास्तव में काफी खतरनाक हो सकती है। इस अध्ययन के अनुसार, ड्राइविंग करते समय टचस्क्रीन का उपयोग करना शराब के प्रभाव में कार चलाने से भी ज्यादा खतरनाक है।

यूनाइटेड किंगडम के चैरिटी आधारित समूह द्वारा सड़क सुरक्षा में सुधार में किये गए अनुसंधान में पाया गया है कि मौजूदा समय की कारें जो अधिकतर टच स्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम के साथ आती हैं, वह चालक का ध्यान भटकाती हैं जिससे चालक को सही प्रतिक्रिया करने में देरी होती है।

इस शोध के अनुसार, टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट स्क्रीन का उपयोग करने वाले ड्राइवर की प्रतिक्रिया का समय उस व्यक्ति की तुलना में 2-3 गुना धीमा होता है जो शराब या भांग के प्रभाव में कार चला रहा होता है।

शोध में एप्पल कार प्ले और एंड्राइड ऑटो वाले कारों के लिए नियंत्रण, सामने वाले वाहन से सुरक्षित दूरी और सतर्कता के पैमानों को जांचा गया था। वहन में टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे चालक कार चलाते समय कम सतर्क पाए गए।

यह पाया गया कि टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम का उपयोग करते समय ड्राइवर का ध्यान बार-बार सड़क से हट रहा था। ऐसे समय में ड्राइवर किसी भी त्वरित निर्णय तैयार नहीं होता है।

यही नहीं, मॉडर्न कारों में मिलने वाला वॉइस कमांड फीचर भी चालक की सतर्कता को 36 प्रतिशत तक भटका सकता है। वहीं, कार में हैंड्स फ्री फोन पर बात करने से 27 प्रतिशत और टेक्स्ट मेसेज से 35 पतिशत तक दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।


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