सरकार ने कोरोना महामारी की बीच लोगों को दिया एक और झटका, क्या आपको है जानकारी
देश भर में कोरोना महामारी के बीच केंद्र सरकार ने लोगों को एक और बड़ा झटका दे दिया है, सरकार का यह कदम राज्यों में जरुरी चीजों व राशन की पहुंच को भी प्रभावित कर सकता है। इस निर्णय के विरोध के बावजूद भी इसे लाया गया है।

केंद्र सरकार के राजमार्ग मंत्रालय ने हाल ही में एनएचएआई को देश के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों में टोल वसूली फिर से शुरू करने के आदेश दिए थे। अब टोल वसूली 20 अप्रैल से शुरू कर दी गयी है, हालांकि ट्रांसपोर्ट जगत ने सरकार के इस कदम की खूब आलोचना की थी।

लेकिन सिर्फ टोल वसूली नहीं, एनएचएआई ने टोल फीस में भी बढ़ोत्तरी कर दी है। देश में नए वित्तीय वर्ष के चलते टोल फीस में 5 प्रतिशत की वृद्धि कर दी गयी है, ध्यान देने वाली बात यह है कि यह वृद्धि ऐसे समय में की गयी है जब देश की अर्थव्यवस्था कमजोर स्थिति में है।

देश में लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाया जा चुका है तथा अभी सरकार ने सिर्फ जरुरी सामानों के लिए परिवहन शुरू करने का आदेश दिया है, ऐसे में राज्यों में बढ़े टोल टैक्स की वजह से बहुत से ट्रांसपोर्टर वाहन चलाने से हाथ पीछे ले सकते है।

आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने सरकार के इस कदम का विरोध किया है तथा टोल कलेक्शन को लॉकडाउन के खत्म होने यानि 3 मई तक बंद रखने की मांग कर रही है। इससे जरुरी चीजों की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है।

एआईएमटीसी ने बताया है कि वे भी देश सेवा समझकर कोरोना के डर के बावजूद सामान पहुंचाना चाहते है लेकिन इस तरह के आर्थिक बोझ की वजह से यह और भी मुश्किल होता जा रहा है। बतातें चले कि कोरोना के डॉ की वजह से ड्राईवर भी नहीं मिल रहे है।

वर्तमान में देश के 90 प्रतिशत ट्रक के लिए ड्राईवर नहीं मिल रहे है तथा अधिकतर ट्रक कई अन्य राज्यों में लॉकडाउन की वजह से फंस गए है। ऐसे हालात में सरकार को टोल कलेक्शन से जैसी चीजों में जरुर छुट दी जानी चाहिए।

वर्तमान में देश के कई हिस्से में 20 अप्रैल के बाद परिवहन पर छुट दी गयी है, लेकिन यह अभी तक शहर तक ही सीमित है। ऐसे में आम वाहन का राजमार्ग पर सफ़र करने का सवाल ही नहीं उठता है, इसलिए टोल कलेक्शन पर छुट दी ही जानी चाहिए।


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