Punjab To Ban Pre-1988 Vehicle Numbers: पंजाब में 1988 से पुराने वाहन नंबर होंगे रद्द, जानें कारण
वीआईपी कल्चर को समाप्त करने और सुरक्षा के विचार को ध्यान में रखते हुए, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मोटर वाहन अधिनियम 1988 के लागू होने के बाद भी पुराने रजिस्ट्रेशन नंबरों को बंद करने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग को ऐसे वाहनों के लिए वैकल्पिक वैध संख्या जारी करने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 1988 से पहले जारी किये गए वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों में पहले ही प्रतिबंधित हैं।

ट्रांसपोर्ट विभाग के अनुसार लोग ऐसे वाहन नंबर का इस्तेमाल अपने स्टेटस सिंबल को दर्शाने के लिए करते हैं। ऐसे नंबर वीआईपी कल्चर को बढ़ावा देते हैं। इन नंबरों को ट्रैक करना आसान नहीं होता, इसलिए इनका इस्तेमाल अपराध की घटनाओं को अंजाम देने के लिए भी किया जाता है।

वीआईपी नंबर होने के कारण पुलिस इन गाड़ियों को भी नहीं रोकती, जिसके कारण इनका इस्तेमाल बॉर्डर पर तस्करी और चोरी की सामानों की खरीद-फरोख्त करने के लिए भी किया जाता है। ट्रांसपोर्ट विभाग ने इन नंबरों को राज्य की सुरक्षा की लिए खतरनाक बताते हुए इन्हे बैन करने की बात कही है।

यही नहीं, एक नंबर का इस्तेमाल कई वाहनों में करते भी देखा गया है। पुराने नंबरों का रिकॉर्ड भी ट्रांसपोर्ट विभाग के रजिस्ट्री में नहीं होता है, जिसके चलते इन्हे ट्रैक करना भी पुलिस के लिए परेशानी का काम होता है।

इसी बीच, पंजाब सरकार ने डिजिटल ड्राइविंग लाइसेंस अपग्रेड करने की तारीख को 15 जनवरी तक बढ़ा दिया है। पंजाब सरकार लोगों को डिजिटल ड्राइविंग लाइसेंस लेने के लिए प्रेरित कर रही है।

पंजाब में डिजिटल ड्राइविंग लाइसेंस लेने के लिए www.punjabtransport.org या www.sarathi.parivahan.gov.in वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन दिया जा सकता है। आवेदन देने के बाद डिजिटल रूप में ड्राइविंग लाइसेंस को परिवहन ऐप या डिजिलॉकर ऐप से डाउनलोड किया जा सकता है।

बता दें कि दिल्ली में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट को 15 दिसंबर से अनिवार्य कर दिया गया है। अब पुलिस बगैर नए नंबर प्लेट वाले वाहनों से जुर्माना वसूल रही है। पहले दिन ही दिल्ली पुलिस ने 239 वाहनों का चालान कटा और 5,500 रुपये जुर्माना वसूल किया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार 1 अप्रैल 2019 के पहले खरीदे गए वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगवाना अनिवार्य है, जबकि इसके बाद खरीदे गए वाहन अब नए नंबर प्लेट के साथ ही आ रहे हैं।

हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट दिखने में एक साधारण नंबर प्लेट से के जैसा ही होता है लेकिन इसकी तकनीकी विशेषताएं इसे अलग बनाती हैं। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट में क्रोमियम होलोग्राम स्टीकर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमे वाहन से संबंधित जानकारी जैसे रजिस्ट्रेशन नंबर, इंजन नंबर, चेसिस नंबर आदि अंकित होती है। हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लेने की पूरी प्रक्रिया यहां पढ़ें।

दरअसल किसी कार या बाइक की चोरी के बाद पुलिस से बचने के लिए नंबर प्लेट बदल दिए जाते हैं जिससे पुलिस उस वाहन को ट्रैक नहीं कर पाती। जबकि एक बार हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लग जाने के बाद प्लेट और उसमे लगा स्टीकर निकाला नहीं जा सकता। निकालने की कोशिश करने पर स्टीकर के साथ नंबर प्लेट भी नष्ट हो जाता है।

नए नंबर प्लेट के बगैर रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं दिया जा रहा है। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं लगवाना अपने वाहन के सुरक्षा से समझौता करना है। इसलिए वाहन की सुरक्षा के लिए हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट जरूर लगवाएं।


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