Bio-CNG Buses: पुणे में चलेंगी 20 बायो-सीएनजी बसें, कम की जाएगी डीजल की खपत
पुणे महानगर परिवहन महामंडल लिमिटेड (पीएमपीएमएल) 20 अक्टूबर से शहर में बायो-सीएनजी से चलने वाली 20 बसों को शुरू कर रही है। बसों में लगने वाली बायो सीएनजी की सप्लाई इंडियन आयल कारपोरेशन ने करने की घोषणा की है। बायो-सीएनजी को जैविक कचरे से तैयार किया जाता है। इसे बनाने के लिए घरेलू कचरे या गोबर का इस्तेमाल किया जाता है।

इन बसों को भोसारी से तालेगांव के बीच चलाया जाएगा। सीएनजी को तालेगांव के रिफ्यूलिंग स्टेशन पर भरा जाएगा। इसके अलावा निगड़ी में भी एक रिफ्यूलिंग स्टेशन बनाया जा रहा है जो तीन महीने में बनकर तैयार हो जाएगा। पुणे परिवहन निगम की योजना ऐसे 100 बसों को शुरू करने की है।

2014 में, पुणे नगर निगम और पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम ने नोबल एक्सचेंज एनवायरनमेंट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता किया, ताकि होटल के खाद्य कचरे को इकट्ठा किया जा सके और इसे जैव-ईंधन में परिवर्तित करने के बाद इस्तेमाल किया जा सके।

बायो सीएनजी बसों का परीक्षण दो बार किया जा चुका है। अगले जनवरी तक इस वैकल्पिक ईंधन से चलने वाले 100 से अधिक बसों को उतारने की योजना है। सामान्य सीएनजी के बजाय, सभी बसों को जैव-सीएनजी ईंधन से चलाया जाएगा।

बसों को चलाने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन और मोटर वाहन अनुसंधान संघ से अनुमतियां और अनुमोदन प्राप्त किए गए हैं। पुणे नगर निगम द्वारा 1500 सीएनजी बसें चलाई जा रही हैं। सीएनजी और बायो सीएनजी में ज्यादा अंतर नहीं है, दोनों ईंधनों पर्यावरण को काफी कम प्रदूषित करते हैं।

महाराष्ट्र नागपुर में 80 प्रतिशत बसें बायो-सीएनजी पर चलती हैं। बायो-सीएनजी बसों को चलाकर सीएनजी के अधिक खर्च से बचा जा सकता है। केंद्र सरकार भी इलेक्ट्रिक वाहन और सीएनजी वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित कर ईंधन पर होने वाले खर्च में कटौती करना चाहती है।

सीएनजी के अलावा बायो डीजल से भी काफी संख्या में वाहनों को चलाया जा रहा है। भारत में बायो डीजल 6 प्लांट लगाए गए हैं जिसकी सालाना 650 मिलियन लीटर डीजल बनाने की क्षमता है।


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