जोजिला टनल का निर्माण कार्य हुआ शुरू, 3 घंटे की दूरी तय होगी सिर्फ 15 मिनट में
केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी गुरुवार को जोजिला टनल के निर्माण कार्य का उद्घाटन कर दिया है। जोजिला टनल एशिया महाद्वीप की सबसे लंबी बाई-डायरेक्शनल टनल होने वाली है जिसमे आने और जाने के लिए एक साथ दो लेन बनाए जाएंगे। यह टनल श्रीनगर और लेह के बीच सालों भर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। जोजिला टनल के माध्यम से सब साल में पूरे 12 महीने श्रीनगर, द्रास, कारगिल और लेह के बीच संपर्क बना रहेगा।

जोजिला टनल को 11,578 फीट की ऊंचाई पर बनाया जा रहा है। इस टनल की लंबाई 14.15 किलोमीटर होने वाली है जो दुनिया में कई कीर्तिमान स्थापित करेगी। इस टनल के माध्यम से श्रीनगर-कारगिल-लेह के बीच अब 12 महीने बगैर किसी रुकावट के सम्पर्क बना रहेगा। बताते चलें कि मौजूदा समय में सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण श्रीनगर से लेह जाना आसान नहीं होता है।

सड़कों पर बर्फ जम जाने के कारण सामान्य यातायात कई दिनों तक बाधित रहता है। ऐसे हालात में 15 मिनट का सफर तय करने में घंटो लग जाते हैं। यह टनल सुरक्षा और रणनीति के नजरिये से भी काफी महत्वपूर्ण है। टनल के बनने से कुछ ही मिनटों में सेना का साजो सामान लेह-लदाख पहुंचाया जा सकता है।

जहां पहले श्रीनगर से लेक तक का 14 किलोमीटर का सफर करने में 3 घंटे लगते थे वहीं वेब केवल 15 मिनट में ही सफर तय किया जा सकता है। नितिन गडकरी ने बताया है कि पूर्ण होने पर यह सुरंग आधुनिक भारत के इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। लद्दाख, गिलगित और बाल्टिस्तान में भारत से जुड़े क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सैन्य गतिविधियों को शुरू किया जा सकेगा।

उन्होंने बताया कि लगभग 30 सालों से कारगिल, द्रास और लदाख में यातयात को नए सिरे से शुरू करने की मांग की जा रही थी। टनल के निर्माण से अब एनएच-1 पर श्रीनगर से लेह तक की यातायात को तेजी मिलेगी और सफर में कई घंटे बचाए जा सकेंगे।

इस प्रोजेक्ट को मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) को सौंपा गया है जिसे इस प्रोजेक्ट को 6,808.63 करोड़ में पूरा करना है। सरकार ने बताया है कि सुरक्षा और गुणवत्ता से कोई समझौता किए बिना सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की बचत भी होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2018 में जोजिला टनल की निर्माण शिला की स्थापना की थी। इस प्रोजेक्ट को पहले आईएल एंड एफएस कंपनी को सौंपा गया था लेकिन कंपनी के दिवालिया होने के बाद इस प्रोजेक्ट में काम रोक दिया गया था। इस साल फरवरी में नितिन गडकरी ने प्रोजेक्ट की पुनः समीक्षा की जिसमे इसे दोबारा बिडिंग के लिए पेश किया गया था।


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