नीति आयोग ने केंद्र को भेजा बैटरी प्रोडक्शन फेसेलिटी का प्रस्ताव, ईवी होंगे सस्ते
केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाले विभाग नीति आयोग ने भविष्य के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक योजना का प्रस्ताव रखा है। इस योजना के तहत भारत में हाई-आउटपुट इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी निर्माण यूनिट को शुरू किया जाएगा।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विभाग केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहा है और मंजूरी मिलते ही इन यूनिट को शुरू किया जाएगा और साल 2022 तक उत्पादन शुरू हो जाएगा। बता दें कि वित्त मंत्रालय ने पहले साल के लिए 700 करोड़ रुपये की सब्सिडी की मंजूरी दे दी है।

अगर यह योजना पास हो जाती है तो भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी का उत्पादन शुरू हो जाएगा। बैटरी में इस्तेमाल होने वाले खुरदरे पदार्थ जैसे लीथियम, कोबाल्ट और लोहे पर जीरो इंपोर्ट ड्यूटी लगेगी।

नीति आयोग 50 जीडबल्यूएच आउटपुट के साथ 10 फैक्ट्रियों को स्थापित करने का लक्ष्य बना रही है। आप इसका इस बात से अंदाजा लगा सकते है कि 1 जीडब्ल्यूएच आउटपुट से 46,000 नेक्सन ईवी को पॉवर दिया जा सकता है।

नीति आयोग का लक्ष्य है कि साल 2022 में पहली फैक्ट्री का काम शुरू किया जा सके। अगर ऐसा हुआ तो अगले 10 सालों में इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी काफी कम दामों में मिलने लगेगी।

इसके साथ ही इन फैक्ट्रियों के जरिए देश के युवाओं और अनुभवी कामगारों को रोजगार भी मिलेगा। बैटरी के दामों में कमी आने से इलेक्ट्रिक वाहनों के दामों में भी कमी आएगी।

बता दें कि हाल ही में हुंडई, एमजी और टाटा ने अपने इलेक्ट्रिक वाहनों को भारतीय बाजार में लॉन्च किया है। लेकिन इन वाहनों के दाम काफी ज्यादा होने के चलते ये बहुत से लोगों की पहुंच से बाहर है।

हालांकि इलेक्ट्रिक वाहनों के कुछ नुकसान भी है। इलेक्ट्रिक वाहनों की एक लिमिटेड रेंज होती है और साथ ही इसे चार्ज करने में समय भी काफी लगता है। लेकिन इलेक्ट्रिक वाहन चलाने और मेनटेन करने के लिहाज से काफी सस्ते है।

ऐसी स्थिति में इस बैटरी पॉलिसी के साथ-साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी काम करने की जरूरत है। इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में सबसे बड़ा चैलेंज इनकी लिमिटेड रेंज और ज्यादा चार्जिंग समय है।


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