NHAI’s New Guidelines: जालसाजी कर प्रोजेक्ट लेने वाली कंपनियों पर एनएचएआई करेगी एफआईआर
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ऐसे ठेकेदारों, सलाहकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए एक व्यापक नीतिगत दिशानिर्देश तैयार कर रहा है, जो प्रोजेक्ट लेने के लिए फर्जी तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। मंत्रालय ने नया दिशानिर्देश दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट में गड़बड़ी पाए जाने के बाद लाया है।

यह फैसला एक ऐसे ही मामले के सामने आने के बाद लिया गया जब हाईवे बिल्डिंग अथॉरिटी ने पाया कि हरियाणा में पड़ने वाले दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट के पैकेज के लिए बोली लगाते हुए एक कंपनी ने फर्जी दस्तावेज जमा किए थे।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने कहा कि मैसर्स राज कॉर्पोरेशन लिमिटेड, मैनपुरी (यूपी) को अगले दो वर्षों के लिए एनएचएआई की किसी भी चालू और भविष्य की बोलियों में भाग लेने से वंचित कर दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाने वाली कंपनी ने अपने टर्नओवर से अधिक की रसीद पेश की थी, यह जानकारी दस्तावेजों के जांच के बाद सामने आई। मामले को देखते हुए एनएचएआई के अधिकारियों ने मंत्रालय से कंपनी पर कार्रवाई की मांग की।

एनएचएआई ने जाली प्रमाण पत्र जारी करने के लिए कंपनी के वैधानिक लेखा परीक्षकों, रामजी श्रीराम एंड एसोसिएट्स, मैनपुरी और सुनील सिंघल एंड कंपनी, आगरा के चार्टर्ड एकाउंटेंट्स इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

एनएचएआई ने बताया कि कंपनी को जाली दस्तावेज प्रस्तुत करने के एवज में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसमे कंपनी ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। जिसके बाद कंपनी को मौजूदा प्रोजेक्ट से बाहर निकलते हुए भविष्य में किसी अन्य प्रोजेक्ट की बोली लगाने से रोक दिया गया है।

एनएचएआई के चेयरमैन डॉ. एस. एस. संधू ने कहा, "एनएचएआई प्रोजेक्ट की बोली लगाने और अनुबंध देने की बहुत पारदर्शी प्रणाली का इस्तेमाल करती है। ठेकेदारों, सलाहकारों द्वारा बोली प्रक्रिया में किसी भी कपटपूर्ण व्यवहार को कड़ाई से निपटा जाएगा। हम ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज करने पर व्यापक नीति दिशानिर्देश भी तैयार कर रहे हैं।"


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