Delay In Vehicle Scrappage Policy: वाहन स्क्रैपेज पॉलिसी में हो रही देरी से एनजीटी नाराज, दी चेतावनी
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से वाहन स्क्रैपेज पॉलिसी को लागू करने में हो रही देरी पर आपत्ति जताई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सूचना जारी कर कहा है कि अगर 6 जनवरी 2021 तक स्क्रैपेज पॉलिसी पर गाइडलाइन्स पेश नहीं किये गए तो परिवहन मंत्रालय के संयुक्त सचिव पर कार्रवाई की जाएगी।

सूचना में यह भी कहा गया है कि स्क्रैपेज पॉलिसी को लागू करने में हो रही देरी पर संयुक्त सचिव को जवाब देना होगा और यह बताना होगा की उनपर कार्रवाई क्यों नहीं की जाए। बता दें कि परिवहन मंत्रालय ने 2018 से ही वाहनों के लिए स्क्रैपेज पॉलिसी को लागू करने की योजना बना रही है।

परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी कई बार अपने भाषणों में स्क्रैपेज पॉलिसी को जल्द लागू करने की बात कह चुके हैं। बहरहाल, अभी तक मंत्रालय के तरफ से स्क्रैपेज पॉलिसी को लागू करने की कोशिश जारी है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का कहना है कि देश में पुराने वाहनों को नष्ट करने के लिए कोई सरकारी नीति के न होने के कारण वाहनों के कबाड़ से प्रदूषण बढ़ रहा है। ट्रिब्यूनल चाहती है कि जल्द से जल्द पुराने वाहनों के लिए एक राष्ट्रीय नीति निर्धारित की जाए।

मौजूदा समय में छोटे कारखानों में असंगठित रूप से वाहनों को नष्ट करने का उद्योग चलाया जा रहा है। ऐसे कारखानों में मानक प्रक्रिया को पूरा नहीं किया जाता है जिससे कारखानों के आस-पास वाले इलाकों में प्रदूषण फैल रहा है।

एनजीटी ने बताया है कि देश भर में करीब 2.1 करोड़ वाहन हैं जो 2025 तक कबाड़ हो जाएंगे। इतनी बड़ी संख्या में कारों को व्यवस्थित तरीके से स्क्रैप करने के लिए एक राष्ट्रीय स्क्रैपेज पॉलिसी की जरूरत है। एनजीटी ने परिवहन मंत्रालय को आदेश दिया है कि वाहनों को स्क्रैप करने के लिए दिशानिर्देश बनाए जाएं जिसके तहत व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से वाहनों को डिस्पोज किया जा सके।

देश के प्रमुख ऑटोमोबाइल संघ जैसे फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरर्स (एसआईएएम) ने केंद्र सरकार से जल्द ही प्रभावी वाहन स्क्रैपेज पॉलिसी को लाने की मांग की है।


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