Fine For Speeding On Mumbai-Pune Expressway: अब एक्सप्रेसवे पर स्पीडिंग पर लगेगा 1000 रुपये का फाइन
महाराष्ट्र हाईवे पुलिस ने घोषणा की है कि 1 अगस्त से मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा के बीच स्पीडिंग करने पर 1000 रुपये फिने लगाया जाएगा। पुलिस ने कहा है कि उर्से व खालापुर टोल प्लाजा के बीच अधिक गति से वाहन चलाने वालों पर कार्यवाही की जायेगी।

यह दोनों टोल प्लाजा मुंबई व पुणे के अंत में हैं तथा एक दूसरे से करीब 50 किलोमीटर दूर हैं। अधिकारियों ने इस छह लेन हाईवे में घाट वाले हिस्से में स्पीड लिमिट को 50 किमी/घंटा व अन्य दूसरे हिस्सों में 100 किमी/घंटा की अधिकतम गति की सीमा तय की गयी है।

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे में घाट का हिस्सा करीब 15 किलोमीटर का है तथा अनुमान है कि यात्रियों को तय स्पीड लिमिट में इस हिस्से को पार करने में करीब 37 मिनट का समय लगेगा। कोई व्यक्ति इससेकम समय में दूसरे टोल प्लाजा पर पहुंच जाता है तो उस पर 1000 रुपये का फाइन लगाया जाएगा।

अगर कोई बार-बार इस नियम का उल्लंघन करता है तो उस पर बड़ा फाइन लगाया जा सकता है। इस नियम को पालान करवाने के लिए टोल गेट से पार हो रहे सभी वाहनों को सीसीटीवी द्वारा मॉनिटर किया जाएगा, उनकी एंट्री व एग्जिट टाइम को नोट किया जाएगा।

इसका उल्लंघन करने वालों को ई-चालान भेजा जाएगा। अगर यह कदम मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर सफल रहता है तो हाईवे अधिकारी इसे राज्य भर के राज्यीय व राष्ट्रीय हाईवे पर लागू कर सकते हैं। यह देश की सबसे व्यस्त हाईवे में से एक है।

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की 94 किलोमीटर लंबी है, लगातार व्यस्त होने की वजह से यहां लगातार हादसे होते हैं। बतातें चले कि मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे में 2019 में 39 लोगों की जान गयी थी जिसमें से खंडाला घाट हिस्से में सबसे अधिक 35 लोगों की जान गयी थी।

लॉकडाउन के दौरान सड़कों पर गाड़ियों के नहीं चलने से सड़क हादसों में भारी कमी आई है। 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। देश में 24 मार्च से 31 मई के बीच 8,976 मौतें कम हुई हैं, इसके अलावा 25,000 सड़क दुर्घटनाएं कम हुई हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र में 1632 हादसे हुए हैं। सरकार ने विश्वस्तरीय राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के विकास के लिए देश के सभी आईआईटी, एनआईटी और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेजों से संपर्क किया है। एनएचएआई चाहती है कि संस्थागत सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत ऐसे संस्थान राष्ट्र निर्माण में अपना सहयोग दें ताकि देश आत्मनिर्भरता के पथ पर आगे बढ़ सके।


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