'जीरो फैटेलिटी कॉरिडोर' अभियान बचा रहा है जान, एक्सप्रेसवे पर हादसों में मरने वालों में आई कमी
पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे पर चलाए जा रहे 'जीरो फैटेलिटी कॉरिडोर' अभियान से एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं में 43 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। इस अभियान को महाराष्ट्र सड़क विकास निगम, महाराष्ट्र हाईवे पुलिस, महिंद्रा एंड महिंद्रा और सेव लाइफ फाउंडेशन के सयुंक्त पहल द्वारा चलाया जा रहा है।

अभियान के तहत जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि 2016 में सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या जहां 151 थी वहीं 2019 में यह घटकर 86 पर आ गई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 'जीरो फैटेलिटी कॉरिडोर' अभियान के तहत प्रशासन लोगों में ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता फैलाने में कामयाब हुई है। इसके साथ ही पुलिस ट्रैफिक नियमों को पहले से ज्यादा सख्ती से लागू कर रही है।

आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि दुर्घटनाओं की गंभीरता प्रति 100 दुर्घटनाओं में मृत्यु की संख्या के रूप में परिभाषित की गई है, जिसमे मृत्यु दर 53.3% से घटकर 24.8% रह गई है।

हालांकि, गंभीर घटनाओं में कमी आई है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि हाई स्पीड कॉरिडोर पर दुर्घटनाओं की संख्या में काफी वृद्धि हुई है।

अधिकारियों के अनुसार हाई स्पीड कॉरिडोर पर महाराष्ट्र सड़क विकास निगम द्वारा किए गए इंजीनियरिंग बदलावों के कारण यह संभव हो पाया है।

निगम ने सड़क किनारे अवैध मानव निर्मित संरचनाओं, संकीर्ण रास्तों, दृस्टि बाधा जैसे सड़क दुर्घटनाओं के मुख्य 15 कारणों को हटाने पर काम किया है।

रिपोर्ट के अनुसार ऐसे 11 मुख्य कारणों का निपटारा कर लिया गया है जिसमे 3000 इंजीनियरिंग मसलों को सुलझा लिया गया है। हाई स्पीड कॉरिडोर पर पिछले 4 साल में 2,700 नए साइन बोर्ड भी लगाए गए हैं।

सेव लाइफ फाउंडेशन के संस्थापक पियूष तिवारी ने कहा कि उनका लक्ष्य 2021 तक सड़क हादसों में शून्य मृत्यु दर प्राप्त करना है। सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए ड्रोन, इंटेलीजेंट ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम और स्मार्ट हाईवे पेट्रोलिंग की सहायता ली जा रही है।


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