मारुति सुजुकी ने 20 दिनों में बनाए 1,500 वेन्टिलेटर, सरकार ने अब तक नहीं दिया डिस्पैच का ऑर्डर
कोरोना वायरस पूरी दुनिया में तेजी से फैलता जा रहा है। अब तक इस खतरनाक वायरस से पूरी दुनिया में 30 लाख से भी ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और 2.11 लाख से भी ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में भी इस वायरस का संक्रमण फैलता जा रहा है।

भारत की बात करें तो अब तक इस वायरस से कुल 29 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और 934 लोगों की मौत हो चुकी है। अभी भी लगातार इस वायरस से संक्रमण के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इस वायरस से लोगों का इलाज करने के लिए हजारों स्वास्थ्य कर्मी दिन रात लगे हुए हैं।

जहां एक ओर इन स्वास्थ्य कर्मियों की मदद के लिए सरकार आगे आई है, वहीं भारत की ऑटो मोटिव इंडस्ट्री ने भी मदद के हाथ बढ़ाए हैं। इस खतरनाक वायरस के इलाज के लिए एक सबसे जरूरी उपकरण वेन्टिलेटर है, जिसकी सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है।

लेकिन इस माह के शुरुआत में केंद्र सरकार ने वेन्टिलेटर की संख्या कम होने के चलते भारत की ऑटोमोटिव इंडस्ट्री से यह आग्रह किया था कि वे वेन्टिलेटर का उत्पादन करें। इस लिए कुछ वाहन निर्माता कंपनी जैसे मारुति सुजुकी और महिंद्रा ने इस पर काम शुरू कर दिया था।

यहां तक कि मारुति सुजुकी ने अपने हेल्थ केयर पार्टनर के साथ मिलकर वेन्टिलेटर के 1,500 यूनिट सिर्फ 20 दिनों में बना भी लिए थे, लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि इन वेन्टिलेटर का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनी को सरकार की ओर से इनकी डिलीवरी का ऑर्डर नहीं आया है और कंपनी अभी भी सरकार के ऑर्डर का इंतजार कर रही है। इस बात की जानकारी मारुति सुजुकी के चेयरमैन आर. सी. भार्गव ने दी है।

उन्होंने बताया कि "सरकार ने हमें यह बाताया था कि देश में वेन्टिलेटर की बहुत ज्यादा कमी है। एचएलएल लाइफ केयर ने इन बने हुए वेन्टिलेटर की जांच भी की थी, लेकिन इसके बारे में उन्होंने हमें अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं भेजी है।"

उन्होंने बताया कि "हम अभी भी उनकी रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं और साथ ही उनके ऑर्डर का भी इंतजार कर रहे हैं कि यह सभी वेन्टिलेटर कहां बेजने हैं। जब सरकार निर्णय लेने की बात करती है तो सरकारी कंपनियां हमेशा सबसे तेज नहीं होती हैं और हो सकता है कि एक निजी कंपनी ने अलग तरीके से काम किया हो।"


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