Mahindra Stops Investment In Ssangyong: महिंद्रा सैंगयॉन्ग मोटर्स के लिए ढूंढ रही है नया निवेशक
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में लगातार हो रहे नुकसान को देखते हुए महिंद्रा एंड महिंद्रा ने इस बात की घोषणा की है कि वह अब अपनी सैंगयॉन्ग मोटर्स में कोई भी निवेश नहीं करेगी। महिंद्रा द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार कंपनी इस ब्रांड के लिए एक इनवेस्टर की तलाश कर रही है।

इसके साथ ही कंपनी पूरी तरह से साउथ कोरियन बाजार से बाहर नहीं जाना चाहती है। इसके अलावा महिंद्रा ने अपने ऑटोमोटिव और ट्रैक्टर बिजनेस के लिए इस साल एक नई ‘वॉक-रन-फ्लाई' रणनीति अपनाने का फैसला लिया है।

इस रणनीति के तहत महिंद्रा ने कुछ कठिन निर्णय लिए हैं, जिनमें यूएसए के इलेक्ट्रिक स्कूटर बिजनेस जेन्ज को बंद करना और कोरियन कार निर्माता कंपनी आगे कोई भी निवेश न करना शामिल है। बता दें कि पिछले पांच सालों महिंद्रा ने विलय और अधिग्रहण के माध्यम से कई अंतरराष्ट्रीय सहायक कंपनियों में निवेश किया है।

लेकिन इन सभी कंपनियों में निवेश के बाद मैनेजमेंट को पिछले कुछ सालों में इनसे संतुष्ट करने वाला परिणाम नहीं मिला है। बता दें कि सैंगयॉन्ग और जेन्ज ने मिलकर अंतर्राष्ट्रीय सहायक कंपनियों से कुल 2,719 करोड़ रुपये के लगभग 80 प्रतिशत रकम का नुकसान किया है।

कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार महिंद्रा एंड महिंद्रा और महिंद्रा व्हीकल मैन्युफेक्चरर लिमिटेड का वित्तीय वर्ष 2019-20 में रेवेन्यू 44,866 करोड़ रुपये रहा है, जो कि 15 प्रतिशत कम है। सारे करों को निकाल कर कंपनी को इस साल 740 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ है।

बता दें कि पिछले साल के मुकाबले कंपनी का यह मुनाफा 86 प्रतिशत कम है। कंपनी का मानना है कि पहले बीएस6 उत्सर्जन मानकों के लागू होने और बाद में कोरोना वायरस की वजह से लगाए गए लॉकडाउन के चलते इतना नुकसान हुआ है।

बता दें कि घाटे में चल रही कंपनी सैंगयॉन्ग में महिंद्रा करीब 75 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखती है। हैरानी की बात तो यह है कि फरवरी में ही सैंगयॉन्ग के बोर्ड ने 3 साल की व्यावसायिक योजना को मंजूरी दी थी, जो कि कंपनी को साल 2022 तक प्रॉफिट की ओर ले जाएगी।


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