DGCA Warns Pilots For Locust Danger: टिड्डों के हमले को लेकर डीजीसीए ने जारी किया सर्कुलर
भारत में टिड्डों के हमले से ना सिर्फ किसान बल्कि इससे हवाई जहाजों और यात्रियों को भी खतरा है। देश में अनेक राज्यों में हो रहे टिड्डों के हमले को देखत हुए डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) के विमान पायलट और इंजीनियरों के लिए सर्कुलर जारी किया है जिसमे उन्हें टिड्डों के झुंड को देखते ही तुरंत सुचना देने का आदेश दिया गया है।

डीजीसीए ने बताया है कि टिड्डों का झुंड हवाई जहाज के लिए खतरनाक हो सकता है। आमतौर पर टिड्डों का झुंड नीचे ही उड़ता है जिससे विमान के टेक ऑफ या लैंडिंग के वक्त दुर्घटनाएं हो सकती हैं। यह भी हो सकता है कि उड़ान के वक्त ही पायलट्स पूरी तरह से टिड्डों के कारण कुछ भी ना देख सकें। ऐसे में हादसा भी हो सकता है।

भारत 21 सालों बाद रेगिस्तानी टिड्डों का इतना व्यापक आतंक झेल रहा है। पाकिस्तान से होते हुए रेगिस्तानी टिड्डों का झुंड पहले राजस्थान में घुसा। इसके बाद पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश तक फैल गया है। यह जहां भी जा रहे हैं वहां फसलों को नष्ट कर रहे हैं।

सर्कुलर में टिड्डों के खतरे से सचेत करते हुए कहा गया है कि टिड्डे जमीनी सतह के नजदीक उड़ते हैं इसलिए टेक ऑफ या लैंडिंग करते समय पायलटों को चौकन्ना रहने को कहा गया है।

सर्कुलर में यह भी बताया गया है कि विमान के नजदीक आने पर टिड्डे विमान के अंदर भी घुस सकते हैं। टिड्डे इंजन इनलेट, एयर कंडीशनिंग पैक इनलेट आदि में घुस कर विमान को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

डीजीसीए ने बताया कि टिड्डों का झुंड विमान के वायरलेस संचार को बाधित कर सकता है साथ ही हवा की गति और दिशा का पता लगाने वाले उपकरण को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

इस बीच, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में एक याचिका दायर कर हालात से निपटने के लिए केंद्र सरकार की आकस्मिक योजना को लागू करने की मांग की गई है। एक एनजीओ द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि आकस्मिक योजना होने के बावजूद राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे कई राज्य फरवरी से टिड्डियों के हमले का सामना कर रहे हैं और कुछ क्षेत्रों में स्थिति खराब हो रही है।


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