Advanced Driver Assistance System: एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम रखेगा आपकी कार को सुरक्षित
ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) एडवांस मोटर वाहन इलेक्ट्रॉनिक्स में सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक है। यह सिस्टम कड़े सरकारी मापदंडों और ग्राहक की सुरक्षा का अनुपालन करता है ताकि दुर्घटनाओं में कमी लाते हुए सड़कों पर सुरक्षा को बढ़ाया जा सके। हालांकि, विदेशों में कार कंपनियां इस तकनीक का इस्तेमाल करना शुरू कर चुकी हैं, लेकिन भारत में इसे लेकर अभी जागरूकता की कमी है।

कार ग्राहकों के बीच हुए वैश्विक स्तर के एक सर्वे में यह सामने आया कि 4,500 कार मालिकों में अधिकतर को इस तकनीक के बारे में कोई जानकारी नहीं है। हालांकि, दोबारा कार खरीदने वाले ग्राहकों में इस तकनीक से युक्त कारों को खरीदने वालों की संख्या 79-89 प्रतिशत है। इससे पता चलता है कि लोग नए कारों में इस फीचर को पसंद कर रहे हैं।

क्या है एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम ?
एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम एक तरह का मॉनिटरिंग सिस्टम है जो कार के बहार चरों तरफ के वातावरण की इमेजिंग तैयार करता है और इससे जुटाई गई जानकारी को कार के अंदर लगे कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंचाता है। यह सिस्टम ड्राइवर को आने वाले खतरों से आगाह करता है ताकि समय पर दुर्घटना से बचा जा सके।

कार से बहार वातावरण की जानकारी जुटाने के लिए कार कार में लगे कैमरे, राडार, लाइडार और इमेजिंग का इस्तेमाल किया जाता है। यह तकनीक कार में लगे क्रूज कंट्रोल सिस्टम, वार्निंग सिस्टम, पार्किंग असिस्टेंट, इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम, लेन सिस्टम साथी कई अन्य फीचर्स को भी नियंत्रित करता है।

भारत में यह तकनीक अपने शुरूआती चरण में है। इस तकनीक का पूरी तरह फायदा उठाने के लिए सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर में 3जी-4जी इंटरनेट कनेक्टिविटी के साथ एडवांस लेन मैनेजमेंट सिस्टम को लाने की जरूरत है। फिलहाल, भारत में ऐसी काम सड़कें है जहां यह तकनीक कारगर है।

2018 में हुए भारतीय ऑटोमोबाइल संघ के एक सम्मेलन में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि वे एक जनादेश लाने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिससे भारत में सभी कारों में 2022 तक एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम को लाया जा सकेगा।

दी गयी समयावधि को ध्यान में रखते हुए, इसके कार्यान्वयन से पहले एक लंबा रास्ता तय करना बाकी है। इंटेलिजेंट ड्राइवर असिस्ट सिस्टम एक महँगी तकनीक है और इस तकनीक का इस्तेमाल करने वाली कारें महंगी हो सकती हैं। मौजूदा समय में मर्सिडीज-बेंज, ऑडी और वोल्वो ऐसी कुछ कंपनियों में हैं जो इस तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं।


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