Railway Shramik Trains: रेलवे ने श्रमिक ट्रेन से कमाएं 429 करोड़ रुपये, गुजरात से सबसे अधिक
देश में लॉकडाउन के बाद भारतीय रेलवे ने श्रमिको को घर पहुंचाने के लिए श्रमिक ट्रेन चलाए थे। रेलवे ने यह ट्रेन मजदूरों को उनके गृह राज्य पहुंचाने के लिए 1 मई से चलाया था तथा 9 जुलाई तक रेलवे ने श्रमिक ट्रेन की टिकट से 429.29 करोड़ रुपये जमा किये हैं।

भारतीय रेलवे ने इन ट्रेनों को चलाने के लिए करीब 2400 करोड़ रुपये खर्च किये हैं। रेलवे ने सबसे अधिक कमाई गुजरात, महाराष्ट्र व तमिलनाडु से की है, इन राज्यों से क्रमशः 102 करोड़, 85 करोड़ तथा 34 करोड़ की कमाई की है।

टिकट के पैसे राज्यों द्वारा दिए जाने थे, लेकिन कई जगह से खबर आई थी कि स्थानीय प्रशासन ने श्रमिकों से पैसे लिए हैं। श्रमिकों को उनके गृह राज्य पहुंचाने के लिए 1 मई से स्पेशल ट्रेन शुरू किये गये थे जो कि इस महीने तक जारी थी।

वैसे मंत्रालय के सीनियर अधिकारी ने जानकारी दी है कि सभी श्रमिक ट्रेन चलाने के लिए कुल 2400 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं तथा उन्होंने आगे कहा कि जमा की गयी राशि को श्रमिक ट्रेन चलाने के लिए लिए गये खर्च के रसीद के रूप में लिया जाना चाहिए।

मंत्रालय ने जून में जानकारी दी थी कि श्रमिक स्पेशल ट्रेन में प्रति यात्री की टिकट औसतन 600 रुपये थी तथा ट्रेनों को चलाने के लिए प्रति व्यक्ति 3400 रुपये का खर्च आया है। अधिकारियों ने बताया कि टिकट का खर्च राज्यों से लिया गया है।

बतातें चले कि श्रमिक ट्रेन को चलाने के लिए 85 प्रतिशत खर्च रेलवे ने उठाया है तथा सिर्फ 15 प्रतिशत खर्च राज्यों को सौंपा गया था। देश में लॉकडाउन के दौरान मजदूरों को वापस लाने के लिए यह बहुत ही जरुरी कदम था जिससे लाखों मजदूर घर पहुंच पायें हैं।

1 मई से 9 जुलाई के बीच रेलवे ने कुल 4496 ट्रेन चलाए हैं, जिनमें 63 लाख लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया है। फीस की बात करें तो सामान्य स्लीपर टिकट पर 30 रुपये का सुपरफ़ास्ट चार्ज तथा 20 रुपये का अतिरिक्त चार्ज लगाया गया था।

देश में मजदूरों को बिना खर्च उनके घर पहुंचाने के लिए यह कदम उठाया गया था। देश भर में अब तक सामान्य ट्रेन सेवा शुरू नहीं की गयी है लेकिन धीरे-धीरे कुछ स्पेशल ट्रेन शुरू की जा रही है, स्थिति को देखतें हुए ट्रेन शुरू किये जायेंगे।


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