कोरोना वायरस के चलते घरेलू वाहन उद्योग को प्रतिदिन होगा 13 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान
कोरोना वायरस के प्रकोप से घरेलू वाहन उद्योग को प्रतिदिन 13-15 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। हालात अगर सामन्य नहीं हुए तो बंदी 31 मार्च के बाद भी जारी रह सकती है।

इकनोमिक टाइम्स ऑटो में छपी रिपोर्ट के अनुसार घरेलू वाहन कंपनियों के साथ सहायक कंपनियों को होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया है। हालांकि, कई बड़ी वाहन कंपनियों ने उत्पादन बंद कर दिया है जबकि किया मोटर्स, रेनॉल्ट-निसान, एमजी मोटर, टीवीएस जैसी कंपनियों ने अपने प्लांट बंद करने को लेकर अभी कोई कदम नहीं उठाया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्पादन और आपूर्ति बंद होने से अगले 10 दिनों की बंदी में घरेलू वाहन उद्योग प्रतिदिन 13-15 हजार करोड़ रुपये का घाटा होगा।

भारत में ऑटोमोबाइल उद्योग का सालाना 7.8 लाख करोड़ का कारोबार है। इस क्षेत्र में हर दिन लगभग 2,000 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित होता है। वाहन उद्योग का जीडीपी में 7.5 प्रतिशत का योगदान देता है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में वाहन उद्योग का 49 प्रतिशत की भागेदारी है। ऑटोमोबाइल सेक्टर पहले से ही कमजोर मांग के कारण पिछले एक साल से मंदी की मार झेल रहा है। ऐसे में उत्पादन बंद होने से समस्या और अधिक गंभीर हो सकती है।

कोरोना वायरस के प्रसार के कारण पहले वाहन निर्माताओं को अपने गैर-विनिर्माण कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कहना पड़ा और अब स्थानीय कारखानों में उत्पादन बंद करना पड़ रहा है।

पिछले 24 घंटों में ऑटो सेक्टर पर कोरोना वायरस का सबसे अधिक प्रभाव देखा गया है। टाटा मोटर्स, हीरो मोटोकॉर्प, मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, अशोक लीलैंड, होंडा, सुजुकी मोटरसाइकिल, हुंडई मोटर इंडिया और एफसीए इंडिया ने कोरोनावायरस के प्रकोप के कारण अपने संयंत्रों को बंद करने की घोषणा की है।


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