Autonomous Survey Craft Developed: आईआईटी मद्रास ने तैयार किया स्वचालित सर्वेक्षण नौका, जानें
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), मद्रास के शोधकर्ताओं ने हाइड्रोग्राफिक और महासागरीय सर्वेक्षण के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाला मानवरहित नाव तैयार किया है। इस मानव रहित नाव को खासतौर पर भारतीय समुद्र सीमा की निगरानी करने के लिए बनाया गया है। सौर ऊर्जा से चलने वाला यह नाव और समुद्र सीमा पर होने वाले हर गतिविधि पर पैनी नजर रखेगा।

इस नाव में कई ऐसे उपकरण लगाए गए हैं जो समुद्र की सतह से उसकी गहराई मापने का भी काम करेगा, साथ है समुद्री सतह के नीचे होने वाले किसी भी हलचल की सटीक जानकारी निगरानी टीम को प्रदान करेगा। सर्वे के लिए बनाये गए इस नाव को जीपीएस, ब्रॉडबैंड कम्युनिकेशन, 360 डिग्री कैमरा, लाईडार जैसे आधुनिक उपकरणों से लैस किया गया है।
सर्वे नाव का पहला सफल परीक्षण चेन्नई के कामराजर बंदरगाह पर किया गया है। इसके बाद कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर इसका परीक्षण कठिन परिस्थितियों में किया जाएगा।
सर्वेक्षण के लिए बनाये गए इस नाव को आईआईटी मद्रास के जलमार्ग, बंदरगाह और तट विभाग के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है। इस ऑटोनॉमस सर्वे नौका को विकसित करने के प्रमुख प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए विभाग के प्रोफेसर इन-चार्ज, के मुरली ने कहा, "यह भारतीय समुद्री क्षेत्र के स्वदेशीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, वर्तमान में इस क्षेत्र में विदेशी प्रौद्योगिकी प्रभुत्व है।"
यह नौका बहुत उथले पानी में भी सटीकता से गहराई माप सकता है। यह सर्वे नौका बंदरगाह पर बढ़ते बड़े समुद्री जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने और जहाजों में अधिकतम सुरक्षित वजन को भी सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा।
के मुरली आगे बताते हैं कि यह नौका किसी व्यस्त समुद्री मार्ग का वैकल्पिक मार्ग निकलने का भी काम करेगा जिससे जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के चलती रहे। इसका उपयोग नदियों, नहरों, बंदरगाह, डैम, झील, आदि पर किया जा सकता है।
यह एक मानव रहित नौका है जिसे रिमोट की मदद से संचालित किया जाता है। इसे ऊर्जा प्रदान करने के लिए सोलर पैनल और बैटरी सेट लगाए गए हैं। यह जल सतह पर 5 घंटे बिना तैर सकता है।


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