Green Stickers On BS6 Vehicles From October: अक्टूबर से बीएस6 वाहनों में ग्रीन स्टीकर होगा अनिवार्य
देश भर में 1 अप्रैल से बीएस6 उत्सर्जन नियम लागू हो गए हैं ऐसे में केंद्र सरकार ने बीएस6 वाहनों की पहचान करने के लिए वाहनों में ग्रीन स्टीकर को लगाना अनिवार्य कर दिया है। बीएस6 वहनों में हरा रंग का स्टीकर लगाया जाएगा जिससे बीएस6 वाहनों को अलग पहचान मिलेगी। इस नियम को सरकार 1 अक्टूबर 2020 से लागू करने जा रही है।

केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक आदेश में कहा है कि बीएस6 वाहनों के नंबर प्लेट में सरकार द्वारा जारी ग्रीन स्टीकर लगाना अनिवार्य होगा। यह स्टीकर 1 सेंटीमीटर का होगा जिसे थ्री व्हीलर और फोर व्हीलर वाहन के विंडशील्ड के अंदर और टू व्हीलर वाहन के नंबर प्लेट पर लगाया जा सकेगा।

इस आदेश को मोटर वाहन आर्डर 2018 के तहत बनाये गए हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट नियम को संशोधित करके लाया गया है। बीएस6 पेट्रोल और सीएनजी वाहनों के लिए यह स्टीकर हलके नीले रंग का होगा जबकि डीजल वाहन के लिए नारंगी रंग का स्टीकर लगाया जाएगा। बता दें कि 1 अप्रैल 2019 से मंत्रालय ने सभी वाहनों में एचएसआरपी (हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट) लगवाने का सर्कुलर जारी किया था।

मंत्रालय ने इस सर्कुलर में वाहन मालिकों को सलाह दी है कि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट जरूर लगवाएं, क्योंकि यह खोए या चोरी हुए वाहन को ट्रैक करने में मदद करता है। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट दिखने में एक साधारण नंबर प्लेट से के जैसा ही होता है लेकिन इसकी तकनिकी विशेषताएं इसे अलग बनाती हैं।

हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट में क्रोमियम होलोग्राम स्टीकर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमे वाहन से संबंधित जानकारी जैसे रजिस्ट्रेशन नंबर, इंजन नंबर, चेसिस नंबर आदि अंकित होती है। होलोग्राम स्टीकर में यह जानकारी हॉट-स्टांपिंग मशीन के जरिये अंकित की जाती है और इसे सिर्फ विशेष रूप से तैयार किये गए मशीन से ही पढ़ा जा सकता है।

दरअसल किसी कार या बाइक की चोरी के बाद पुलिस से बचने के लिए नंबर प्लेट बदल दिए जाते हैं जिससे पुलिस उस वाहन को ट्रैक नहीं कर पाती। जबकि एक बार हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लग जाने के बाद प्लेट और उसमे लगा स्टीकर निकाला नहीं जा सकता। निकालने की कोशिश करने पर स्टीकर के साथ नंबर प्लेट भी नष्ट हो जाता है।

साथ ही वाहन चोरी कर भाग रहे व्यक्ति को ट्रैफिक पुलिस तकनीक की मदद से ट्रैक कर सकती है और नंबर प्लेट से कार से जुड़ी जानकारी निकाल सकती है। सरकार के निर्देशानुसार वाहन डीलरों को हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का काम सौंपा गया है। इसके लिए ऑटोमोबाइल विक्रेताओं ने वाहन कंपनियों कंपनियों के साथ समझौता किया है।


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