यह चीनी कंपनी भारत में प्रवेश करने का कर रही है इंतजार, नई नियम बनी बाधा
भारत का एसयूवी बाजार लगातार बढ़ते जा रहा है तथा यह मौजूदा कंपनियों के साथ साथ बाहरी कंपनियों को भी आकर्षित करने लगी है। भारत में पिछले साल किया मोटर्स व एमजी मोटर ने प्रवेश किया है तथा दोनों ही कंपनी बाजार में एसयूवी लाकर छा गयी है।

ऐसे ही चीन की सबसे बड़ी एसयूवी निर्माता कंपनी ग्रेट वाल मोटर्स भी भारत में प्रवेश करना चाहती है तथा पिछले कुछ समय इस कोशिश करने में लगी हुई है लेकिन सफल नहीं हो पा रही है। इसका कारण है कि कंपनी कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रस्ताव सरकार के पास अटका हुआ है।

अब इस प्रस्ताव को बहुत से विदेशी कंपनी लेकर देख रहे हैं जो कि भारत में प्रवेश करना चाहते हैं। ग्रेट वाल मोटर्स भारत में 1 बिलियन डॉलर का निवेश करने वाली है और इस योजना के तहत ही कंपनी ने जनवरी में जनरल मोटर्स की तालेगांव स्थित फैक्ट्री को 950 करोड़ में खरीदा था।

वैसे तो भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में एफडीआई ऑटोमेटिक रूप से अप्रूव हो जाती है लेकिन चीन से होने वाले किसी भी एफडीआई में सरकार की अनुमति की जरूरत पड़ती है। इस वजह से अभी यह सरकार के पास अटकी हुई है।

सूत्रों के अनुसार सुरक्षा कारणों की वजह से यह प्रस्ताव गृह मंत्रालय द्वारा भी देखा जाएगा। बताया जा रहा है कि करीब 40 से अधिक चीनी निवेश सिक्यूरिटी क्लियरेंस का इंतजार कर रही है। हालांकि ग्रेट वाल मोटर्स ने इस पर कोई जानकारी नहीं दी है।

इसके साथ ही कई और चीनी वाहन कंपनियां जैसे चंगन, चेरी तथा हाईमा, ग्रेट वाल मोटर्स के केस को देखने वाली है क्योकि यह कंपनियां भी भारत में प्रवेश करने का खाका तैयार कर रही है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखतें हुए यह निवेश प्रस्ताव बहुत ही अहम हो जाते हैं।

देश में अप्रैल में सरकार ने नया नियम लाया था कि जो भी देश भारत से बॉर्डर शेयर करते हैं वहां से किसी भी तरह का निवेश होता है तो उसे पहले सरकार की अनुमति लेनी होगी, यह उन सेक्टर में भी लागू होगा जहां ऑटोमेटिक तरीके से अनुमति मिलती है।

यह नियम इसलिए लाया गया था ताकि कोविड-19 के दौरान खराब स्थिति का फायदा उठाकर कोई विदेशी कंपनी भारत की कंपनियों को ना हथिया ले। हालांकि यह कब तक चलने वाला है इसकी कोई जानकारी नहीं मिली है।


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