Global NCAP To Become More Stringent: ग्लोबल एनकैप क्रैश टेस्ट में जोड़े जाएंगे नए प्रोटोकाॅल
भारत में ग्लोबल एनकैप क्रैश टेस्ट को और अधिक मजबूत बनाने की तैयार चल रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबल एनकैप टेस्ट में दुर्घटना के दौरान होने वाले साइड इम्पैक्ट को नए प्रोटोकॉल के रूप में लाया जा सकता है। दरअसल, ग्लोबल एनकैप अपने मापदंडों में यूरो एनकैप के तर्ज पर सुधार लाना चाहती है।

ग्लोबल एनकैप टेस्ट के दौरान सभी कारों का साइड इम्पैक्ट टेस्ट नहीं किया जाता है। मौजूदा समय में ग्लोबल एनकैप कारों का सिर्फ एक क्रैश टेस्ट करती है, जिसमे कार को एडल्ट और चाइल्ड सेफ्टी के मापदंडों पर रेटिंग दी जाती है।

नए प्रोटोकॉल में कारों के क्रैश होने के बाद उससे सुरक्षित निकलने की क्षमता को भी परखा जाएगा। जानकारी के अनुसार कंपनी नए टेस्ट प्रोटोकॉल को जानवर 2022 से लागू कर सकती है।

ग्लोबल एनकैप क्रैश टेस्ट में कार को 64 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पर समान वजन के ब्लॉक से टकराया जाता है। इस टक्कर में कार के सामने का 40 प्रतिशत हिस्सा शामिल होता है।

एनकैप के अनुसार यह स्पीड किसी सामान्य रास्ते पर दो टकराने वाली कार को ध्यान में रखकर तय की गई है। पांच स्टार रेटिंग पाने वाली कारों का साइड इम्पैक्ट टेस्ट भी किया जाता है। यह टेस्ट कार कंपनियों के द्वारा भी की जा सकती है। हालांकि, निष्पक्षता साबित करने के लिए अधिकतर कंपनियां एनकैप का सहारा लेती हैं।

यूरो एनकैप क्रैश टेस्ट की बात करें तो, इसमें कारों को टेस्ट करने के लिए ग्लोबल एनकैप से अधिक मापदंड अपनाए जाते हैं। अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई एनकैप में भी साइड इम्पैक्ट टेस्ट को शामिल किया गया है।

यूरो एनकैप टेस्ट में कार के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद उससे यात्रियों के निकलने की क्षमता का भी परीक्षण किया जाता है। ग्लोबल एनकैप में भी इस प्रोटोकॉल को जोड़ने की समीक्षा की गई है। ग्लोबल एनकैप के द्वारा टेस्ट की गई सबसे लेटेस्ट कार नई महिंद्रा थार है जिसे सुरक्षा में 4 रेटिंग दिया गया है।


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